ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट को हाईकोर्ट से मिली राहत, भूमि अधिग्रहण पर रोक
UP: ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध किसानों को मिला स्टे

Image: Amar Ujala
आगरा में ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से राहत मिली है। कोर्ट ने एडीए को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया और संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
- 01हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों को फौरी राहत दी है।
- 02एडीए को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है।
- 03कमलेश बाबू ने 17 साल बाद 1200 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजे का विरोध किया है।
- 04ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।
- 05इस प्रोजेक्ट में 6,700 करोड़ रुपये की लागत से 4,000 से अधिक आवासीय भूखंड शामिल हैं।
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ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट, जो आगरा के इनर रिंग रोड पर स्थित है, को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से एक महत्वपूर्ण झटका लगा है। किसानों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसके परिणामस्वरूप कोर्ट ने एडीए को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता कमलेश बाबू ने बताया कि उन्हें 17 साल बाद केवल 1200 रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि एडीए इस जमीन को 33 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर बेच रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले महीने इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था, जिसमें 6,700 करोड़ रुपये की लागत से 4,000 से अधिक आवासीय भूखंड और 10 नदियों के नाम पर टाउनशिप शामिल हैं। अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
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इस निर्णय से किसानों को भूमि अधिग्रहण के खिलाफ राहत मिली है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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