बिहार में जदयू की राजनीति: निशांत कुमार की 'सद्भाव' यात्रा और पार्टी के भीतर की दरारें
Bihar JDU Politics: निशांत कुमार की 'सद्भाव' यात्रा, क्यों बिगड़ रहा जदयू का आपसी प्रेम?
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बिहार की राजनीति में जदयू के भीतर दो धड़ों के बीच बढ़ती दरारों के बीच, निशांत कुमार की 'सद्भाव यात्रा' ने नया मोड़ लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 30 विधायकों की टीम बनाई गई है, जिसका उद्देश्य 2030 विधानसभा चुनावों के लिए निशांत को स्थापित करना है।
- 01जदयू दो धड़ों में बंटता दिख रहा है, एक तरफ समर्थक और दूसरी तरफ विरोधी।
- 02निशांत कुमार की यात्रा को नीतीश कुमार का समर्थन प्राप्त है।
- 03राजद के भीतर भी निशांत की यात्रा से हलचल मची है।
- 042030 विधानसभा चुनावों के लिए निशांत कुमार को एक संभावित नेता के रूप में देखा जा रहा है।
- 05जदयू के भीतर की राजनीति में संशय और दबाव की स्थिति बनी हुई है।
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बिहार में जदयू की राजनीति में हालिया घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर की दरारों को उजागर किया है। 'जय निशांत, तय निशांत' के नारों के बीच, पार्टी के दो धड़े स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। एक धड़ा, जिसमें श्रवण कुमार, उमेश कुशवाहा और संजय गांधी शामिल हैं, नीतीश कुमार की नीतियों का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा धड़ा, जिसमें केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और विजय चौधरी शामिल हैं, अपनी अलग रणनीति बना रहा है। निशांत कुमार की 'सद्भाव यात्रा' के तहत नीतीश कुमार ने 30 विधायकों की एक टीम बनाई है, जिसका उद्देश्य 2030 के विधानसभा चुनावों के लिए निशांत को स्थापित करना है। इस यात्रा ने राजद के भीतर भी हलचल मचा दी है, जहां तेजस्वी यादव मानते हैं कि जदयू टूटने पर उनका लाभ होगा। जदयू के भीतर की यह राजनीति भविष्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
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इस राजनीतिक हलचल से जदयू और राजद के समर्थकों के बीच की स्थिति प्रभावित हो सकती है, और यह आगामी विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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