सुवेंदु अधिकारी: छात्र राजनीति से बीजेपी के नेता बनने तक का सफर
छात्र राजनीति, आंदोलन से सियासत के शिखर तक... कैसे शुरू हुआ था सुवेंदु अधिकारी का सफर? पूरी कहानी
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सुवेंदु अधिकारी, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के प्रमुख नायक हैं, ने ममता बनर्जी के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। उनके नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया और उन्होंने 2021 में ममता को हराकर विपक्ष के नेता के रूप में उभरे।
- 01सुवेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर में हुआ।
- 02उन्होंने 1989 में कांग्रेस की छात्र परिषद से राजनीति में कदम रखा।
- 03नंदीग्राम आंदोलन ने उनके करियर में महत्वपूर्ण मोड़ लाया।
- 042021 में उन्होंने ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हराया।
- 05सुवेंदु की यात्रा राजनीति में वफादारी और बगावत की कहानी है।
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सुवेंदु अधिकारी, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की भारी जीत के प्रमुख नायक हैं, का राजनीतिक सफर 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर में एक राजनीतिक परिवार में जन्म लेकर शुरू हुआ। उन्होंने 1989 में कांग्रेस की छात्र परिषद से राजनीति में कदम रखा और 1995 में कांथी नगर पालिका के पार्षद बने। 2007 का नंदीग्राम आंदोलन उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां उन्होंने 'भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी' का गठन किया और किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। 2021 में उन्होंने ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हराकर विपक्ष के नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। अब सवाल यह है कि क्या वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनेंगे। उनकी यात्रा राजनीति में वफादारी और बगावत दोनों की ताकत को दर्शाती है।
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सुवेंदु अधिकारी की जीत ने बीजेपी को पश्चिम बंगाल में एक मजबूत स्थिति दिलाई है, जिससे राज्य की राजनीति में बदलाव आ सकता है।
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