बॉम्बे हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: किराएदार ने खरीदी संपत्ति का हिस्सा, बेदखली रोकने में मिली सफलता
जब कोर्ट केस के बीच में ही किराएदार बन बैठा मकान मालिक, 24 साल पुराने मुकदमे में आया दिलचस्प मोड़

Image: News 18 Hindi
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक 24 साल पुराने संपत्ति विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें किराएदार कुमार ने मुकदमे के दौरान संपत्ति का हिस्सा खरीद लिया। अदालत ने माना कि अब वह सह मालिक है, इसलिए बेदखली की कार्रवाई जारी नहीं रह सकती।
- 01किराएदार कुमार ने 22 अप्रैल 2016 को संपत्ति का 50% हिस्सा खरीदा।
- 02बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि सह मालिक बनने के बाद बेदखली की कार्रवाई जारी नहीं रह सकती।
- 03अदालत ने 'डुअल कैपेसिटी' की स्थिति को मान्यता दी, जिसमें कुमार किराएदार और सह मालिक दोनों हैं।
- 04सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि मालिकाना अधिकार किराएदारी अधिकार से ऊंचा है।
- 05कुमार ने संपत्ति के बंटवारे की कानूनी कार्रवाई भी शुरू की थी, जिससे उसकी सह मालिक के तौर पर स्थिति मजबूत हुई।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक दिलचस्प संपत्ति विवाद में फैसला सुनाया, जिसमें एक किराएदार, कुमार, ने मुकदमे के दौरान संपत्ति का 50% हिस्सा खरीद लिया। यह मामला 2002 से चल रहा था, जब मकान मालिक वरेल ने कुमार के खिलाफ बेदखली की याचिका दायर की थी। अदालत ने 7 अप्रैल 2026 को कहा कि कुमार की संपत्ति में हिस्सेदारी खरीदने के बाद उसकी स्थिति 'डुअल कैपेसिटी' में बदल गई है। इस स्थिति में, उसके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई जारी रखना कानूनी रूप से सही नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने मामलों का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई किराएदार सह मालिक बन जाता है, तो उसका दर्जा बदल जाता है। इस फैसले ने स्पष्ट किया कि यदि किसी किराएदार को मुकदमे के दौरान संपत्ति का मालिकाना हिस्सा मिल जाता है, तो यह उसकी कानूनी स्थिति को पूरी तरह बदल सकता है।
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इस फैसले ने संपत्ति विवादों में किराएदारों की स्थिति को मजबूत किया है।
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