अमेरिकी अदालत ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर फीस का आदेश रद्द किया, भारत को होगा लाभ
ट्रंप को कोर्ट से बड़ा झटका, H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर फीस का आदेश रद्द; भारत को कैसे होने जा रहा बड़ा फायदा?

Image: Zee News
अमेरिकी अदालत ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस को गैर-कानूनी करार दिया, जिससे भारत के पेशेवरों को अमेरिका में नौकरी पाने में मदद मिलेगी। इस फैसले से भारतीयों की H-1B वीजा प्राप्ति की दर बढ़ने की उम्मीद है।
- 01अमेरिकी न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस को रद्द किया।
- 02इस फैसले से भारत के आईटी पेशेवरों और अन्य क्षेत्रों के युवाओं को अमेरिका में नौकरी पाने का मौका मिलेगा।
- 03H-1B वीजा का लगभग 70-71% हिस्सा भारतीयों को मिलता है।
- 04ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है, जिससे स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।
- 05अमेरिकी कंपनियों को इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी, जिससे उनकी सेवाएं मजबूत होंगी।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका लगा है, जब एक अदालत ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस को रद्द कर दिया। इस निर्णय को गैर-कानूनी करार देते हुए, न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने कहा कि राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना इस तरह का शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। यह फैसला 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर मुकदमे के बाद आया। H-1B वीजा का लगभग 70-71% हिस्सा भारतीयों को मिलता है, और इस फैसले से भारत के पेशेवरों को अमेरिका में नौकरी पाने का अवसर बढ़ेगा। पहले 1 लाख डॉलर की फीस के कारण कई भारतीय पेशेवर अमेरिका नहीं जा पा रहे थे, जिससे वहां की सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। अब इस शुल्क के रद्द होने से टेक कंपनियों को राहत मिलेगी और भर्तियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है, जिससे स्थिति अभी भी अनिश्चित है।
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भारत के पेशेवरों को अमेरिका में नौकरी पाने का बेहतर अवसर मिलेगा।
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