अमेरिका की चागोस द्वीप समूह खरीदने की योजना: भारत की चिंताएँ
चागोस द्वीप खरीदने को क्यों बेताब है US? मॉरीशस के साथ सीधे करेगा डील, भारत में क्यों जताई जा रही फैसले पर चिंता
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अमेरिका चागोस द्वीप समूह को सीधे मॉरीशस से खरीदने की योजना बना रहा है, जिससे भारत को चिंता है कि इससे हिंद महासागर में अमेरिकी प्रभुत्व बढ़ेगा। यह द्वीप समूह अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे के कारण।
- 01चागोस द्वीप समूह पर अमेरिका का कब्जा हिंद महासागर में उसकी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करेगा।
- 02भारत, मॉरीशस का प्रमुख सुरक्षा सहयोगी है और द्वीप समूह पर उसके नियंत्रण से भारत को लाभ हो सकता है।
- 03चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के खिलाफ भारत के लिए मॉरीशस एक महत्वपूर्ण काउंटर बैलेंस है।
- 04अमेरिका का स्थायी कब्जा भारत की स्वतंत्र रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
- 05यदि अमेरिका ने मॉरीशस पर दबाव डाला, तो यह भारत और मॉरीशस के रिश्तों को कमजोर कर सकता है।
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चागोस द्वीप समूह, जो मॉरीशस का हिस्सा है, अमेरिका के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। अमेरिका का इरादा इस द्वीप समूह को सीधे मॉरीशस से खरीदने का है, जिससे भारत में चिंता बढ़ गई है। भारत का मानना है कि यदि अमेरिका ने इस द्वीप पर स्थायी कब्जा कर लिया, तो इससे हिंद महासागर में उसकी स्थिति मजबूत होगी और भारत की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा। चागोस द्वीप समूह में डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा है, जिसका उपयोग अमेरिका मध्य पूर्व और एशिया में सैन्य कार्रवाइयों के लिए करता है। भारत, जो मॉरीशस का प्रमुख सुरक्षा सहयोगी है, चाहता है कि यह क्षेत्र बहुपक्षीय रहे। अगर अमेरिका ने इस द्वीप पर कब्जा कर लिया, तो इससे भारत की निगरानी और लॉजिस्टिक क्षमताओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत को चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के खिलाफ भी इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करनी है।
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अमेरिका का चागोस द्वीप समूह पर कब्जा भारत की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
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