अमेरिका में बिना GRE/GMAT के मास्टर्स में एडमिशन: जानें 'टेस्ट-ऑप्शनल' नीति के लाभ
Study in US: बिना GRE/GMAT भी मिल जाएगा अमेरिका में एडमिशन? समझ लें 'टेस्ट-ऑप्शनल' वाला नियम
Image: Nbt Navbharattimes
अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज ने 'टेस्ट-ऑप्शनल' नीति अपनाई है, जिसका अर्थ है कि छात्रों को GRE या GMAT स्कोर देने की आवश्यकता नहीं है। यह नीति छात्रों को आवेदन में अधिक लचीलापन देती है, लेकिन एक अच्छा स्कोर उन्हें एडमिशन और स्कॉलरशिप में मदद कर सकता है।
- 01'टेस्ट-ऑप्शनल' नीति का मतलब है कि छात्रों को GRE या GMAT स्कोर देना अनिवार्य नहीं है।
- 02अमेरिका की कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज जैसे स्टैनफोर्ड और MIT में GRE/GMAT की आवश्यकता नहीं है।
- 03एक अच्छा GRE/GMAT स्कोर छात्रों के लिए 'सीक्रेट वेपन' साबित हो सकता है, खासकर जब CGPA कम हो।
- 04GRE और GMAT स्कोर का उपयोग छात्रों की विश्लेषणात्मक और प्रबंधन क्षमताओं का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।
- 05लक्ष्मी अय्यर ने बताया कि GRE/GMAT स्कोर छात्रों को रिसर्च और टीचिंग असिस्टेंटशिप के लिए भी लाभ पहुंचा सकता है।
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अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज ने 'टेस्ट-ऑप्शनल' नीति को अपनाया है, जिसका अर्थ है कि छात्रों को मास्टर्स प्रोग्राम में दाखिले के लिए GRE या GMAT स्कोर देने की आवश्यकता नहीं है। यह नीति छात्रों को आवेदन प्रक्रिया में अधिक लचीलापन प्रदान करती है। हालांकि, कई छात्र फिर भी इन परीक्षाओं को देने का विकल्प चुनते हैं। 'टेस्ट-ऑप्शनल' नीति के तहत, यदि कोई छात्र बिना स्कोर के आवेदन करता है, तो उसकी योग्यता का मूल्यांकन अन्य कारकों जैसे बैचलर्स में CGPA, प्रोजेक्ट्स, कार्य अनुभव, सिफारिश पत्र और उद्देश्य पत्र के आधार पर किया जाता है। लक्ष्मी अय्यर, एक अध्ययन सलाहकार, ने कहा कि एक अच्छा GRE या GMAT स्कोर छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण लाभ हो सकता है, खासकर यदि उनका CGPA कम है। यह स्कोर उन्हें मेरिट स्कॉलरशिप और रिसर्च असिस्टेंटशिप के लिए भी मदद कर सकता है।
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यह नीति भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में उच्च शिक्षा के अवसरों को बढ़ाती है।
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