गवली समाज का मांस और शराब पर सख्त प्रतिबंध, निष्कासन के बाद होती है पुनः स्वीकृति
मांस खाया तो गांव से निष्कासन, शुद्धिकरण के बाद होती है वापसी, गवली समाज का इतना कड़ा अनुशासन
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हरदा जिले के बापचा गांव में गवली समाज ने मांस और शराब के सेवन पर सख्त प्रतिबंध लगाया है। नियम तोड़ने पर व्यक्ति को 37 दिनों के लिए समाज से बाहर कर दिया जाता है, जिसके बाद पारंपरिक शुद्धिकरण प्रक्रिया से उसे पुनः समाज में शामिल किया जाता है।
- 01गवली समाज में मांस और शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है।
- 02नियम तोड़ने पर व्यक्ति को 37 दिनों के लिए निष्कासित किया जाता है।
- 03निष्कासन के दौरान व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं करता।
- 04पुनः स्वीकृति के लिए जलपाक नामक पारंपरिक शुद्धिकरण प्रक्रिया अपनाई जाती है।
- 05गवली समाज में बकरी पालन वर्जित है, इसे अशुद्ध माना जाता है।
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हरदा जिले के बापचा गांव में गवली समाज ने अपनी संस्कृति और अनुशासन को बनाए रखा है, जिसमें मांस और शराब का सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे 37 दिनों के लिए समाज से निष्कासित कर दिया जाता है। इस अवधि के दौरान वह गांव के बाहर रहता है और किसी भी सामाजिक गतिविधि में भाग नहीं ले सकता। निष्कासन के बाद, व्यक्ति को जलपाक नामक एक पारंपरिक शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसमें गोमूत्र, दूध और गंगाजल का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद ही उसे समाज में पुनः शामिल किया जाता है। गवली समाज में बकरी पालन को अशुद्ध माना जाता है, इसलिए वे केवल गायों का पालन करते हैं। यह कड़ा अनुशासन आज के व्यसनों के दौर में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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गवली समाज के अनुशासन और परंपराएं स्थानीय समुदायों में व्यसन और नशे के खिलाफ एक उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
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