बैतूल में मूंग फसल के पंजीकरण में देरी, बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता
गिरदावरी न होने से मूंग पंजीयन अटका, बैतूल में बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत
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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मूंग फसल के पंजीकरण में गिरदावरी की कमी के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है। 15,000 हेक्टेयर में उगाई गई मूंग की फसल बारिश के कारण खराब होने की कगार पर है, जबकि पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जून है।
- 01बैतूल में 15,000 हेक्टेयर में मूंग की खेती की गई है।
- 02ई-उपार्जन पोर्टल पर 90 प्रतिशत किसानों की फसल अभी तक अपडेट नहीं हुई है।
- 03गिरदावरी के बिना, किसान समर्थन मूल्य पर अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं।
- 04बारिश के कारण फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
- 05पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जून है, लेकिन गिरदावरी की कमी से किसान परेशान हैं।
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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में रवि सीजन की मूंग फसल के पंजीकरण में गिरदावरी की कमी से किसानों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 15,000 हेक्टेयर में उगाई गई मूंग की फसल के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया 25 मई से शुरू हुई थी, लेकिन राजस्व विभाग ने 90 प्रतिशत किसानों की फसल को अभी तक अपडेट नहीं किया है। गिरदावरी की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण किसान समर्थन मूल्य पर अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं। इस बीच, जिले में बारिश शुरू हो गई है, जिससे खेतों में रखी फसल खराब होने की संभावना बढ़ गई है। किसान लगातार पटवारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जून है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी किसानों की गिरदावरी दर्ज कर दी जाएगी। हालाँकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या प्रशासन समय पर गिरदावरी पूरी कर पाएगा।
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किसानों को अपनी मूंग फसल बेचने में कठिनाई हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
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