सुपरअल्कली से हाइड्रोजन स्टोरेज क्षमता में वृद्धि की संभावना
Gorakhpur News: सुपरअल्कली के प्रयोग से बढ़ा सकते हैं हाइड्रोजन स्टोरेज की क्षमता

Image: Amar Ujala
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंबरीश श्रीवास्तव ने 'फ्रंटियर्स इन केमिस्ट्री' जर्नल में प्रकाशित एक शोध समीक्षा में बताया है कि सुपरअल्कली का उपयोग कर हाइड्रोजन स्टोरेज की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। यह शोध वैश्विक स्तर पर बेहतर हाइड्रोजन भंडारण समाधानों के लिए महत्वपूर्ण है।
- 01डॉ. अंबरीश श्रीवास्तव की समीक्षा 'फ्रंटियर्स इन केमिस्ट्री' जर्नल में प्रकाशित हुई है।
- 02सुपरअल्कली रासायनिक अणु या अतिपुंज होते हैं जिनकी आयनीकरण ऊर्जा पारंपरिक क्षार धातुओं से कम होती है।
- 03सुपरअल्कली का उपयोग उन्नत पदार्थों के निर्माण में किया जाता है।
- 04यह शोध कार्य 'बेहतर हाइड्रोजन भंडारण समाधानों के लिए परमाणु-अतिपुंजों का उपयोग' विषय पर केंद्रित है।
- 05सुपरअल्कली शक्तिशाली अपचायक के रूप में कार्य करते हैं।
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गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंबरीश श्रीवास्तव ने हाल ही में 'फ्रंटियर्स इन केमिस्ट्री' जर्नल में एक महत्वपूर्ण शोध समीक्षा प्रकाशित की है। इस समीक्षा में बताया गया है कि सुपरअल्कली का प्रयोग कर हाइड्रोजन स्टोरेज की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। सुपरअल्कली विशेष रासायनिक अणु होते हैं, जिनकी आयनीकरण ऊर्जा पारंपरिक क्षार धातुओं जैसे सोडियम या लिथियम से कम होती है। यह विशेषता इन्हें शक्तिशाली अपचायक के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाती है, जिससे उन्नत पदार्थों के निर्माण में इनका व्यापक उपयोग संभव है। यह शोध वैश्विक स्तर पर बेहतर हाइड्रोजन भंडारण समाधानों के लिए महत्वपूर्ण है।
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यह शोध हाइड्रोजन भंडारण की क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
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