Guru Pradosh Vrat 2026: तिथियाँ, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
Guru Pradosh Vrat 2026: कब है गुरु प्रदोष व्रत, जानिए तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
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गुरु प्रदोष व्रत 2026 में दो बार मनाया जाएगा, पहला 15 मई को और दूसरा 29 मई को। यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है, जो सुख, समृद्धि और मानसिक शांति लाने का विश्वास दिलाता है।
- 01गुरु प्रदोष व्रत 2026 में दो बार मनाया जाएगा: 15 मई और 29 मई।
- 02प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त शाम 5:22 से 7:04 बजे तक है।
- 03व्रत के दौरान फल या सात्विक भोजन करने और नकारात्मकता से दूर रहने की सलाह है।
- 04इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा का महत्व है।
- 05प्रदोष व्रत आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति का साधन माना जाता है।
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गुरु प्रदोष व्रत 2026 में दो बार मनाया जाएगा, पहला प्रदोष व्रत 15 मई को और दूसरा 29 मई को। प्रदोष व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस व्रत को हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मई में, पहले प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त शाम 5:22 से 7:04 बजे तक है। वहीं, दूसरे प्रदोष व्रत का समय 28 मई को सुबह 7:56 बजे से प्रारंभ होगा और 29 मई को सुबह 9:50 बजे समाप्त होगा। व्रत के दौरान फल या सात्विक भोजन करने, नकारात्मकता से दूर रहने और जरूरतमंदों को दान देने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर तांडव करते हैं, जिससे इस समय की गई पूजा का विशेष महत्व होता है। यह व्रत भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।
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गुरु प्रदोष व्रत के दौरान भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
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