इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: वैवाहिक विवाद में समझौता होने पर मुकदमा जारी रखने का औचित्य नहीं
High Court : वैवाहिक विवाद में समझौता हो गया तो मुकदमा जारी रखने का औचित्य नहीं
Amar Ujala
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि वैवाहिक विवाद में पक्षकारों ने आपसी समझौता कर लिया है, तो आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना उचित नहीं है। न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला ने इस मामले में मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया है।
- 01हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में आपसी समझौते के बाद मुकदमा जारी रखने को अनुचित बताया।
- 02न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला ने ट्रायल कोर्ट में लंबित मुकदमे की कार्यवाही रद्द की।
- 03याचियों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज थी।
- 04पक्षकारों ने 23 अगस्त 2024 को समझौता किया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 को सत्यापित किया।
- 05कोर्ट ने निजी विवादों में समझौते के बाद दोषसिद्धि की संभावना कम होने का उल्लेख किया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि वैवाहिक या पारिवारिक विवाद में पक्षकारों ने आपसी समझौता कर लिया है, तो आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना उचित नहीं है। न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की एकल पीठ ने नितेश शर्मा और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में लंबित मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया। याचियों के खिलाफ फर्रुखाबाद के महिला थाना में दहेज उत्पीड़न, मारपीट, छेड़छाड़, जान से मारने की धमकी और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज थी। याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि विवाद पति-पत्नी के बीच कलह के कारण उत्पन्न हुआ था और दोनों पक्षों ने 23 अगस्त 2024 को लिखित समझौता किया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 को सत्यापित किया। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि व्यक्तिगत विवादों में समझौते के बाद दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम हो जाती है।
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इस निर्णय से वैवाहिक विवादों में आपसी समझौता करने वाले पक्षकारों को राहत मिलेगी और उन्हें कानूनी उत्पीड़न से बचने का अवसर मिलेगा।
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