काशी का प्राचीन कर्दमेश्वर महादेव मंदिर: भगवान राम की मुक्ति का स्थल
बनारस का सबसे पुराना 'जीवित' मंदिर! जहां भगवान राम को मिली थी रावण वध के पाप से मुक्ति; औरंगजेब भी नहीं मिटा सका इसका अस्तित्व
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काशी, उत्तर प्रदेश में स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर को सबसे पुराना जीवित शिव मंदिर माना जाता है। यह वह स्थान है जहां भगवान राम ने रावण वध के पाप से मुक्ति पाने के लिए महादेव की शरण ली थी। मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और धार्मिक महत्व इसे श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।
- 01कर्दमेश्वर महादेव मंदिर काशी का सबसे पुराना जीवित शिव मंदिर है।
- 02भगवान राम ने रावण वध के पाप से मुक्ति के लिए यहां पूजा की थी।
- 03मंदिर की वास्तुकला नागर शैली में है और इसकी दीवारों पर सुंदर नक्काशी है।
- 0418वीं शताब्दी में बंगाल की रानी भवानी ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था।
- 05यह मंदिर आज भी हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
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काशी, उत्तर प्रदेश में स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर को काशी का सबसे पुराना जीवित शिव मंदिर माना जाता है। यह वह पावन स्थल है जहां भगवान राम ने रावण वध के पाप से मुक्ति पाने के लिए महादेव की शरण ली थी। मंदिर की वास्तुकला नागर शैली में है, जिसमें 6वीं शताब्दी की नर्तकियों और देवताओं की अद्भुत प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं। यह मंदिर कर्दम ऋषि से संबंधित है, जिन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।
मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था और यह मुगल काल में भी सुरक्षित रहा। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया है। कर्दमेश्वर महादेव मंदिर रोजाना सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है और यहां दर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। वाराणसी शहर से इसे आसानी से पहुंचा जा सकता है, जिससे यह धार्मिक मान्यता, प्राचीन इतिहास और अद्भुत वास्तुकला का संगम बन जाता है।
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यह मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो उनकी आस्था को बढ़ाता है और पर्यटन को बढ़ावा देता है।
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