यूपी में बिजली कंपनियों के संविदा कर्मियों की बहाली की मांग उठी
यूपी बिजली कंपनियों में संविदा कर्मियों की बहाली की मांग, उपकेंद्रों पर स्टाफ कम करने का विरोध

Image: Jagran
उत्तर प्रदेश में उपभोक्ता और कर्मचारी संगठनों ने बिजली कंपनियों से निकाले गए संविदा कर्मियों की बहाली की मांग की है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के निर्देश के बाद यह मांग उठी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उपकेंद्रों पर कर्मियों की संख्या कम की जा रही है, जिससे बिजली संकट बढ़ रहा है।
- 01ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बिजली कंपनियों को संविदा कर्मियों को बिना ठोस कारण निकाले जाने का निर्देश दिया है।
- 02राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि 20,000 संविदा कर्मियों को निकाला गया है।
- 03शहरी उपकेंद्रों पर 36 की जगह 18.5 और ग्रामीण उपकेंद्रों पर 20 की जगह 12.5 कर्मियों की व्यवस्था की जा रही है।
- 04संविदा कर्मियों की बहाली की मांग को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने 2017 के मानकों का हवाला दिया है।
- 05अक्टूबर 2024 से मानकों को दरकिनार करते हुए कर्मियों की संख्या घटाने का प्रस्ताव है।
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उत्तर प्रदेश में उपभोक्ता और कर्मचारी संगठनों ने बिजली कंपनियों से निकाले गए संविदा कर्मियों की बहाली की मांग की है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिया है कि संविदा कर्मियों को बिना ठोस कारण नहीं निकाला जाना चाहिए। आरोप है कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन शहरी क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 36 के स्थान पर 18.5 और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 के स्थान पर केवल 12.5 कर्मियों की व्यवस्था कर रहा है। इससे प्रदेश में बिजली संकट उत्पन्न हो रहा है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, 20,000 संविदा कर्मियों की छंटनी की गई है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने 2017 के मानकों के अनुसार कर्मियों की बहाली की मांग की है। अक्टूबर 2024 से मानकों को दरकिनार करते हुए कर्मियों की संख्या घटाने का प्रस्ताव है, जो कि उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है।
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बिजली कंपनियों में कर्मियों की कमी से उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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