चीन के ग्लोबल टाइम्स ने भारत के 114 राफेल सौदे पर उठाए सवाल
'J-10CE फाइटर्स के सामने खुल गई थी पोल', चीन के ग्लोबल टाइम्स ने भारत के 114 राफेल सौदे पर कसा तंज
Image: Nbt Navbharattimes
चीन के ग्लोबल टाइम्स ने भारत के 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे पर तंज कसा है, जिसमें कहा गया है कि यह सौदा भारत की रणनीतिक चिंताओं और घरेलू रक्षा आत्मनिर्भरता की कमी को दर्शाता है। लेख में जे-10सी विमानों के खिलाफ भारत की कमजोरियों का भी उल्लेख किया गया है।
- 01भारत ने फ्रांस के साथ 33.9 अरब डॉलर में 114 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया है।
- 02ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, यह सौदा भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की कमी को उजागर करता है।
- 03भारत की वायुसेना के पास केवल 29 स्क्वाड्रन हैं, जो मंजूर की गई 42 स्क्वाड्रन से कम हैं।
- 04भारत को जे-10सी विमानों के खिलाफ अपनी कमजोरियों को सुधारने के लिए राफेल को अपग्रेड करने की आवश्यकता है।
- 05भारत की मल्टी-अलाइनमेंट रणनीति के तहत राफेल खरीद को अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए देखा जा रहा है।
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चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत के 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर सवाल उठाए हैं। लेख में कहा गया है कि यह सौदा भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' रणनीति का हिस्सा है, जो विभिन्न देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए किया गया है। 33.9 अरब डॉलर का यह सौदा भारत के इतिहास में सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। हालांकि, लेख में यह भी चेतावनी दी गई है कि भारत की वायुसेना की संख्या तेजी से घट रही है, और वर्तमान में उसके पास केवल 29 स्क्वाड्रन हैं। भारत को जे-10सी विमानों के साथ संघर्ष के दौरान सामने आई कमजोरियों को ध्यान में रखते हुए राफेल को अपग्रेड करने की आवश्यकता है। ग्लोबल टाइम्स ने भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम की कमियों का भी उल्लेख किया है, जिसमें तेजस के लिए इंजन की आपूर्ति में देरी शामिल है।
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भारत की वायुसेना की क्षमता में वृद्धि के लिए राफेल का सौदा महत्वपूर्ण है, लेकिन यह घरेलू रक्षा विकास की चुनौतियों को भी उजागर करता है।
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