चिकन की बढ़ती मांग: वैश्विक और एशियाई आंकड़े चौंकाने वाले
Non-Veg Trend: दुनिया में बढ़ा चिकन खाने का क्रेज, लेकिन एशिया के इस आंकड़े ने बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स को चौंकाया

Image: Zee News
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले छह दशकों में वैश्विक मांस की खपत में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिसमें चिकन की खपत लगभग छह गुना बढ़ गई है। एशिया मांस उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, लेकिन प्रति व्यक्ति उपलब्धता कम है।
- 011961 में वैश्विक मीट प्रोडक्शन 7.1 करोड़ टन था, जो अब 36.1 करोड़ टन तक पहुंच गया है।
- 02एशिया में मांस, दूध और अंडों का उत्पादन सबसे अधिक है, लेकिन प्रति व्यक्ति उपलब्धता कम है।
- 03भारत में औसतन एक व्यक्ति सालभर में केवल 4 किलोग्राम मांस का उपभोग करता है।
- 04FAO ने फूड वेस्ट और सप्लाई चेन में नुकसान को बड़ी चुनौती बताया है।
- 05पशुपालन के क्षेत्र में टिकाऊ और जिम्मेदार मॉडल अपनाना आवश्यक है।
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संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक नई रिपोर्ट में वैश्विक मांस की खपत में अभूतपूर्व वृद्धि का उल्लेख किया गया है। पिछले छह दशकों में, चिकन की खपत लगभग छह गुना बढ़ गई है, जबकि पोर्क की खपत भी दोगुनी हो गई है। 1961 में वैश्विक मीट प्रोडक्शन 7.1 करोड़ टन था, जो अब 36.1 करोड़ टन तक पहुंच गया है। एशिया मांस उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, लेकिन जनसंख्या के अनुपात में प्रति व्यक्ति उपलब्धता कम बनी हुई है। उत्तरी अमेरिका में प्रति व्यक्ति मांस, दूध और अंडों की उपलब्धता सबसे अधिक है। FAO ने फूड वेस्ट और सप्लाई चेन में नुकसान को गंभीर चुनौती बताया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पशुपालन की भूमिका खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके दीर्घकालिक टिकाऊ बनाए रखने के लिए पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान आवश्यक है।
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