मोहन भागवत ने कहा, भारत का समय आ गया है; दुनिया में संतुलित प्रगति का अभाव
'संतुलित प्रगति के लिए दुनिया के पास समाधान की कमी', भागवत बोले- भारत का समय आ गया है

Image: Jagran
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा कि दुनिया के पास संतुलित प्रगति के लिए कोई मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं है। उन्होंने भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का समय बताया, जबकि उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला ने आरएसएस की समाज के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।
- 01मोहन भागवत ने कहा कि वैश्विक व्यवस्थाएं व्यक्तिगत, सामाजिक और पर्यावरणीय कल्याण में संतुलन बनाने में विफल हैं।
- 02उन्होंने भारत को ज्ञान और विज्ञान में वैश्विक नेतृत्व का दावा करने की आवश्यकता बताई।
- 03भागवत ने कहा कि दुनिया में सुख, शांति और पर्यावरण संरक्षण का कोई एकीकृत सिद्धांत नहीं है।
- 04कुमार मंगलम बिरला ने आरएसएस की सामाजिक और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की सराहना की।
- 05बिरला ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक प्रशिक्षण शिविर के समापन पर कहा कि दुनिया के पास मानव जीवन के विभिन्न आयामों में संतुलित प्रगति के लिए कोई स्पष्ट मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं है। उन्होंने बताया कि वैश्विक व्यवस्थाएं व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक हितों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में असफल रही हैं। भागवत ने भारत को इस समय वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बताया, यह कहते हुए कि दुनिया संघर्ष-आधारित विकास मॉडल के विकल्प की तलाश में है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में सुख, शांति और पर्यावरण संरक्षण के लिए कोई एकीकृत सिद्धांत नहीं है। उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला ने भी आरएसएस की सराहना की और कहा कि यह हमेशा समाज और राष्ट्र के साथ खड़ा रहा है, भले ही समय चुनौतीपूर्ण हो। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया।
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भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ने का अवसर मिल सकता है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
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