सफलता और खुशी के पीछे भागने का मिथक
कामयाबी का अजीब सच! "जितना इसके पीछे भागोगे, उतना ही यह दूर जाएगी"
Aaj Tak
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विक्टर फ्रैंकल के अनुसार, सफलता और खुशी को लक्ष्य बनाना गलत है। जब हम इन्हें पाने के लिए भागते हैं, तो हम इन्हें खोते हैं। असली खुशी तब मिलती है जब हम अपने काम में समर्पित होते हैं और परिणाम की चिंता छोड़ देते हैं।
- 01सफलता और खुशी को लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए।
- 02खुशी एक उपोत्पाद है, जो तब मिलती है जब हम अपने काम में लगे रहते हैं।
- 03सफलता को टारगेट की तरह देखने से बचें।
- 04अपने काम में आनंद लें, नतीजे पर ध्यान न दें।
- 05दूसरों की मदद करने का मकसद खोजें।
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विक्टर फ्रैंकल का मानना है कि सफलता और खुशी को अपने लक्ष्य के रूप में नहीं देखना चाहिए। जब हम इन्हें पाने के लिए भागते हैं, तो हम इन्हें और दूर कर लेते हैं। असल में, खुशी एक उपोत्पाद है जो तब मिलती है जब हम अपने काम में पूरी तरह से समर्पित होते हैं। जब हम अपने काम का आनंद लेते हैं और परिणाम की चिंता छोड़ देते हैं, तब सफलता खुद ब खुद हमारे पास आती है। जैसे नींद तब आती है जब हम बेफिक्र होते हैं, सफलता भी तब आती है जब हम अपने कर्म में डूब जाते हैं। इसलिए, खुश रहने के लिए खुशी की कोशिश करना बंद करें और ऐसा काम करें जो आपसे बड़ा हो। जब आप खुद को भूलकर काम में खो जाएंगे, तो सफलता और खुशी आपके जीवन में स्वतः प्रवेश कर लेंगी।
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