सुप्रीम कोर्ट का फैसला: वेश्यावृत्ति का व्यवसायीकरण रोकना है मुख्य उद्देश्य
सुप्रीम कोर्ट: वेश्यावृत्ति को खत्म करना हमारा उद्देश्य नहीं; कानून केवल इसके व्यवसायीकरण के खिलाफ
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
सुप्रीम कोर्ट ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत वेश्यावृत्ति को समाप्त करने या आपराधिक बनाने का उद्देश्य न होने की पुष्टि की। कोर्ट ने कहा कि कानून का मुख्य लक्ष्य वेश्यावृत्ति के व्यवसायीकरण को रोकना है और यौनकर्मियों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम का उद्देश्य वेश्यावृत्ति को समाप्त करना नहीं है।
- 02कोर्ट ने यौनकर्मियों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया और पुलिस को उनके मामलों में हस्तक्षेप से बचने की सलाह दी।
- 03वेश्यावृत्ति के व्यवसायीकरण को रोकना इस अधिनियम का मुख्य लक्ष्य है।
- 04महिलाओं की तस्करी और उनके पुनर्वास के मुद्दों पर 20वीं शताब्दी में ध्यान दिया गया।
- 05न्यायालय ने पीड़ित-केंद्रित पुनर्वास पर विशेष बल दिया है।
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नई दिल्ली में, सुप्रीम कोर्ट ने 70 साल पुराने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (आईटीपीए) के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य न तो वेश्यावृत्ति को समाप्त करना है और न ही इसे आपराधिक अपराध बनाना है। इसके बजाय, इसका उद्देश्य वेश्यावृत्ति के व्यवसायीकरण को रोकना है। न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने कहा कि 20वीं शताब्दी में महिलाओं की तस्करी एक आम समस्या थी, और इस अधिनियम का विश्लेषण करते हुए, उन्होंने यह भी कहा कि वेश्यावृत्ति के लिए महिलाओं की तस्करी को अनैतिक माना जाता था। कोर्ट ने यौनकर्मियों के मामलों में हस्तक्षेप से बचने के लिए पुलिस को निर्देशित किया है और यह सुनिश्चित किया है कि यौनकर्मियों को गिरफ्तार या परेशान नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय ने यौनकर्मियों की पसंद का सम्मान करते हुए पीड़ित-केंद्रित पुनर्वास पर जोर दिया है।
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यह निर्णय यौनकर्मियों के अधिकारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है और उनके पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करता है।
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