भारत में महिलाओं में मोटापे की दर बढ़ी, NFHS-6 रिपोर्ट में खुलासा
भारत में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को घेर रहा है मोटापा, NFHS की रिपोर्ट में खुलासा
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Image: Jagran
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, भारत में महिलाओं में मोटापे की दर 30.7 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जबकि पुरुषों में यह 27.3 प्रतिशत है। हाई ब्लड शुगर की समस्या भी बढ़ी है, जिसमें महिलाओं का अनुपात 17.8 प्रतिशत और पुरुषों का 20.9 प्रतिशत है।
- 012019-21 में मोटापे से ग्रस्त महिलाओं का अनुपात 24 प्रतिशत से बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया।
- 02पुडुचेरी में महिलाओं में मोटापे की दर सबसे अधिक 46.3 प्रतिशत है।
- 03हाई ब्लड शुगर के मामले में महिलाओं का अनुपात 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गया।
- 0415-24 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में मासिक धर्म सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों का उपयोग 79.2 प्रतिशत हो गया।
- 05विवाहित महिलाओं के बीच आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों का उपयोग 56.4 प्रतिशत से घटकर 52.7 प्रतिशत हो गया।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। 2019-21 में 15-49 वर्ष आयु वर्ग की 24 प्रतिशत महिलाएं मोटापे से ग्रस्त थीं, जो अब बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गई है। पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत हो गया है। हाई ब्लड शुगर के मामलों में भी वृद्धि हुई है, जिसमें महिलाओं का अनुपात 17.8 प्रतिशत और पुरुषों का 20.9 प्रतिशत है। पुडुचेरी में महिलाओं में मोटापे की दर सबसे अधिक 46.3 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पुरुषों में मोटापे की दर लगभग 38 प्रतिशत है। इसके अलावा, 15-24 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में मासिक धर्म सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों का उपयोग 2019-21 में 77.6 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 79.2 प्रतिशत हो गया है।
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महिलाओं में मोटापे और हाई ब्लड शुगर की बढ़ती दरें स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव डाल सकती हैं।
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