दिल्ली AIIMS ने विकसित की नई स्पाइन सर्जरी तकनीक, जटिल विकृतियों के उपचार में मिली सफलता
दिल्ली AIIMS ने विकसित की स्पाइन सर्जरी तकनीक, जटिल रीढ़ विकृतियों के इलाज में नई उम्मीद; जोखिम भी हुआ कम
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली ने जटिल रीढ़ विकृतियों के उपचार के लिए एक नई सर्जिकल तकनीक विकसित की है। इस तकनीक से सर्जरी के दौरान जोखिम कम हुआ है और मरीजों को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
- 01AIIMS ने जटिल रीढ़ विकृतियों के लिए नई सर्जिकल तकनीक विकसित की है।
- 02इस तकनीक से सर्जरी के दौरान जोखिम कम हुआ है।
- 03मरीजों को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
- 04प्रो. डा. भावुक गर्ग के नेतृत्व में इस तकनीक को विकसित किया गया है।
- 05यह तकनीक पहले से अधिक जटिल मामलों में भी प्रभावी साबित हो रही है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली ने गंभीर और जटिल रीढ़ विकृतियों के उपचार के लिए एक उन्नत सर्जिकल तकनीक विकसित की है। इस तकनीक को प्रो. डा. भावुक गर्ग (रीढ़ शल्य चिकित्सा एवं हड्डी रोग विभाग के विशेषज्ञ) के नेतृत्व में विकसित किया गया है। यह तकनीक पोस्टेरियर वर्टिब्रल कालम रिसेक्शन (पीवीसीआर) का माडिफाइड फार्म है, जो सर्जरी के दौरान रीढ़ के कुछ पोस्टीरियर एलिमेंट्स को सुरक्षित रखता है। इससे सर्जरी के दौरान स्थिरता बनी रहती है और जटिलताओं का जोखिम कम होता है। पहले, सीवियर डिफार्मिटीज वाले मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब इस नई तकनीक के कारण वे सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो रहे हैं। यह तकनीक मरीजों और उनके परिवारों के लिए जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का वादा करती है।
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नई सर्जिकल तकनीक से जटिल रीढ़ विकृतियों के मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है, जिससे उनकी सामान्य जीवन जीने की क्षमता में सुधार हो रहा है।
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