लखनऊ हाईकोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर सुनवाई
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में आज अहम सुनवाई, प्रधानों को प्रशासक बनाने को चुनौती, सरकार रखेगी अपना पक्ष

Image: Zee News
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के दौरान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का मामला लखनऊ हाईकोर्ट में पहुंचा है। सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई आज होगी। याचिकाकर्ता ने इसे कानून के खिलाफ बताया है।
- 01हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर सुनवाई की।
- 02यह आदेश 25 मई 2026 को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जारी किया गया।
- 03याचिकाकर्ता ने इसे उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के खिलाफ बताया।
- 04सरकार ने पंचायत चुनावों में देरी के कारण ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया।
- 05प्रशासक के रूप में ग्राम प्रधानों की नियुक्ति 6 महीने के लिए की गई है।
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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के दौरान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच आज सुनवाई करेगी। यह मामला तब सामने आया जब योगी सरकार ने 25 मई 2026 को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक के रूप में नियुक्त किया। याचिकाकर्ता ओम प्रकाश प्रजापति ने इस आदेश को चुनौती दी है, उनका कहना है कि यह उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के खिलाफ है, जो प्रधानों के कार्यकाल को उनके शपथ लेने के बाद केवल पांच वर्ष निर्धारित करता है। सरकार ने पंचायत चुनावों में देरी के कारण मौजूदा प्रधानों को प्रशासक के रूप में काम करने की अनुमति दी है। यह पहली बार है जब यूपी में ग्राम प्रधानों को प्रशासक का पद सौंपा गया है। कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वे सरकार का पक्ष रखें।
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अगर हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को निरस्त किया, तो यह पंचायत चुनावों की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
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