बंगाल में CAA के तहत 19,000 लोगों को मिली नागरिकता, 1.2 लाख ने किया था आवेदन
बंगाल: CAA के तहत 19000 लोगों को मिली भारत की नागरिकता, 1.2 लाख ने किया था आवेदन

Image: Jagran
पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत 1.2 लाख आवेदकों में से 19,000 को भारतीय नागरिकता के प्रमाण पत्र दिए गए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह जानकारी दी और बताया कि लंबित आवेदकों को भी अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिलेगा।
- 01पश्चिम बंगाल में 1.2 लाख लोगों ने CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया था।
- 02मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 19,000 आवेदकों को नागरिकता प्रमाण पत्र देने की घोषणा की।
- 03लंबित आवेदकों को अन्नपूर्णा योजना का लाभ उठाने की अनुमति दी गई है।
- 04सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले अधिकांश लोग मतुआ समुदाय से हैं।
- 05राज्य में दो अतिरिक्त समितियों का गठन लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए किया गया है।
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पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत 1.2 लाख लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें से 19,000 आवेदकों को भारतीय नागरिकता के प्रमाण पत्र दिए गए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह जानकारी बुधवार को राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद दी। उन्होंने बताया कि जिन आवेदकों के मामले अभी लंबित हैं, उन्हें भी राज्य सरकार की अन्नपूर्णा योजना का लाभ उठाने की अनुमति दी गई है, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। CAA का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करना है। इस कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश करने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। मतुआ समुदाय के लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए, सरकार ने लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए दो अतिरिक्त समितियों का गठन किया है। हालांकि, इस कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है।
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लंबित आवेदकों को अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिलने से उनके जीवन स्तर में सुधार हो सकता है।
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