भारत में प्लास्टिक मुद्रा के लाभ और आवश्यकताएँ
विचार: कई फायदों वाली प्लास्टिक मुद्रा

Image: Jagran
भारत में डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के बावजूद, नकद मुद्रा की मांग बढ़ रही है। प्लास्टिक नोट, जो अधिक टिकाऊ और सुरक्षित हैं, एक संभावित समाधान हो सकते हैं। आरबीआई को घरेलू छपाई क्षमता विकसित करने और जन जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
- 01भारत में हर महीने 20 अरब से अधिक लोग यूपीआई का उपयोग करते हैं।
- 02आरबीआई के अनुसार, मुद्रा की मांग 42.86 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गई है।
- 03प्लास्टिक नोटों की उम्र कागज़ी नोटों की तुलना में 5 से 7 गुना अधिक होती है।
- 04प्लास्टिक नोटों में सुरक्षा के लिए विशेष माइक्रो-आप्टिक और होलोग्राफिक तत्व होते हैं।
- 05भारत में 2009 से प्लास्टिक मुद्रा पर विचार चल रहा है, लेकिन अब इसे लागू करने की आवश्यकता है।
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भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली जैसे यूपीआई के विकास के बावजूद, नकद मुद्रा की मांग में वृद्धि जारी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, मुद्रा की मांग 42.86 ट्रिलियन रुपये तक पहुँच गई है, जिससे हर साल नोट छापने और नष्ट करने में हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इस समस्या का समाधान प्लास्टिक मुद्रा में हो सकता है, जो पालीप्रोपाइलीन से बनी होती है और कागज़ी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होती है। प्लास्टिक नोटों की सुरक्षा विशेषताओं के कारण ये नकली मुद्रा के खिलाफ प्रभावी हैं। भारत में प्लास्टिक मुद्रा के उपयोग के लिए आरबीआई को कई कदम उठाने होंगे, जैसे घरेलू छपाई क्षमता विकसित करना, पायलट परीक्षण शुरू करना और जन जागरूकता बढ़ाना। हालाँकि यूपीआई का उपयोग बढ़ा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में नकद मुद्रा अभी भी आवश्यक है। इसलिए, प्लास्टिक मुद्रा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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प्लास्टिक मुद्रा के लागू होने से भारत में नकद लेनदेन की प्रक्रिया में सुधार होगा और नकली मुद्रा पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
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