राजस्थान में राज्यसभा चुनाव: संभावित 'बाड़ाबंदी' और राजनीतिक रणनीतियाँ
राजस्थान में 3 सीटों राज्यसभा चुनाव का ऐलान: क्या राजनीति एक बार फिर “बाड़ाबंदी” की तरफ बढ़ेगी?

Image: Amar Ujala
राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव 18 जून को होंगे, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। भाजपा दो सीटें जीतने की स्थिति में है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के उतारने पर 'बाड़ाबंदी' की राजनीति एक बार फिर सक्रिय हो सकती है।
- 01भाजपा के पास 118 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 67 विधायक हैं, जिससे भाजपा को दो सीटें जीतने की संभावना है।
- 02राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 51 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है।
- 03भाजपा तीसरे उम्मीदवार के लिए किसी उद्योगपति या समाजसेवी को मैदान में उतारने पर विचार कर रही है।
- 04राजस्थान में राज्यसभा चुनावों के साथ 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' और 'बाड़ाबंदी' की यादें जुड़ी रही हैं।
- 05कांग्रेस के लिए उम्मीदवार चयन का अंतिम फैसला दिल्ली स्तर पर होगा, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
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राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 18 जून को होने वाले हैं, जिसमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा सांसद राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। वर्तमान विधानसभा में भाजपा के पास 118 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 67 हैं, जिससे भाजपा को दो सीटें जीतने की संभावना है। भाजपा इस बार तीसरे उम्मीदवार को उतारने पर विचार कर रही है, जो कि 'थर्ड फैक्टर' के रूप में कार्य कर सकता है। यदि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो 'बाड़ाबंदी' की राजनीति एक बार फिर सक्रिय हो सकती है। भाजपा ने सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार चयन पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। वहीं, कांग्रेस के लिए भी उम्मीदवार चयन का निर्णय दिल्ली स्तर पर होना है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इस चुनाव को केवल सीट जीतने तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि यह राजनीतिक संदेश देने का भी एक मंच बन सकता है।
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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव का परिणाम आगामी निकाय और पंचायत चुनावों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
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