ईरान युद्ध से प्रभावित, भारत में तेल कंपनियों को रोजाना ₹1700 करोड़ का घाटा
रोज ₹1700Cr का घाटा, ईरान युद्ध से संकट में तेल कंपनियां, क्या एक ही रास्ता?
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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत में तेल कंपनियों को हर दिन ₹1700 करोड़ का घाटा हो रहा है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, जबकि वैश्विक ऊर्जा कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
- 01भारत में तेल कंपनियों को रोजाना ₹1700 करोड़ का घाटा हो रहा है।
- 02सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, जबकि वैश्विक कीमतें बढ़ रही हैं।
- 03कच्चे तेल की कीमतों में 50% तक की वृद्धि हुई है।
- 04एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं।
- 05पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि अब एक राजनीतिक निर्णय बन गई है।
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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। भारत में, सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) को हर दिन ₹1700 करोड़ का घाटा हो रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण है कि कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रख रही हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ गई हैं। भारत में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई है। एलपीजी की कीमतों में कुछ वृद्धि की गई है, लेकिन पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो कंपनियों को परिचालन में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि अब एक राजनीतिक निर्णय बन गई है, जिसे सरकार को लेना होगा।
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यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो आम लोगों के लिए ईंधन की लागत में वृद्धि होगी, जिससे परिवहन और दैनिक जीवन की लागत प्रभावित होगी।
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