सीबीएसई 12वीं के परिणाम: ऑन-स्क्रीन मार्किंग के कारण कम नंबर
CBSE 12th में क्यों कम आए नंबर? देखें 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' का डेटा

Image: Aaj Tak
सीबीएसई 12वीं के परिणामों में छात्रों के नंबर कम आने का मुख्य कारण 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली है। इस वर्ष 98,66,222 उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल चेकिंग में तकनीकी कमियों और कड़क मार्किंग के चलते कई छात्रों को नुकसान हुआ है, जिससे कई विषयों में कट-ऑफ में गिरावट आई है।
- 01इस वर्ष 98,66,222 उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल चेकिंग की गई थी, जिसमें तकनीकी समस्याएं आईं।
- 02मैथ्स में A1 ग्रेड के लिए कट-ऑफ 88 से घटकर 85 पर आ गया है।
- 03फिजिक्स में A1 ग्रेड का कट-ऑफ 84 से गिरकर 79 हो गया है।
- 04सीबीएसई ने छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन की त्रि-स्तरीय प्रक्रिया शुरू की है।
- 05ह्यूमैनिटीज में कट-ऑफ में वृद्धि हुई है, जैसे पॉलिटिकल साइंस में A1 का कट-ऑफ 89 पर स्थिर है।
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सीबीएसई (Central Board of Secondary Education) 12वीं के परिणामों में छात्रों के नंबर कम आने का मुख्य कारण 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली है। इस वर्ष कुल 98,66,222 उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल चेकिंग की गई, लेकिन तकनीकी कमियों और कड़क मार्किंग के कारण छात्रों को नुकसान हुआ है। विशेष रूप से मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री और अकाउंटेंसी जैसे विषयों में कट-ऑफ में गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, मैथ्स में A1 ग्रेड के लिए कट-ऑफ 88 से घटकर 85 और फिजिक्स में 84 से गिरकर 79 हो गया है। इसके विपरीत, ह्यूमैनिटीज के विषयों में कट-ऑफ में वृद्धि देखी गई है। छात्रों की चिंता को देखते हुए, सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन की त्रि-स्तरीय प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकते हैं और विषय विशेषज्ञों की मदद से अपनी मार्किंग की जांच कर सकते हैं।
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इस बदलाव से छात्रों को परीक्षा में अपने प्रदर्शन को लेकर चिंता हो रही है, जिससे उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
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