बिहार में सरकारी अग्रिम का कम उपयोग, 39 करोड़ में से केवल 16.05 करोड़ खर्च हुए
बिहार में एडवांस लेने से कतराए मंत्री-अफसर, 39 करोड़ में से केवल 16.05 करोड़ का उपयोग
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बिहार में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 39 करोड़ रुपये में से केवल 16.05 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ है। मंत्रियों और अफसरों ने सरकारी अग्रिम लेने में रुचि नहीं दिखाई, जिससे प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठते हैं।
- 01बिहार में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 39 करोड़ रुपये का अग्रिम प्रावधान किया गया था।
- 02इसमें से केवल 16.05 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ है।
- 03मंत्रियों ने वाहन खरीद के लिए निर्धारित 4.50 करोड़ रुपये का एक भी रुपया नहीं लिया।
- 04गृह निर्माण मद में 11.25 करोड़ रुपये में से केवल 3.67 करोड़ रुपये खर्च हुए।
- 05सरकारी अग्रिम बिना ब्याज के होती है, लेकिन समय पर समायोजन न करने पर ब्याज देना पड़ सकता है।
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बिहार में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 39 करोड़ रुपये के सरकारी अग्रिम में से केवल 16.05 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ है। यह स्थिति प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाती है, क्योंकि मंत्रियों ने वाहन खरीद के लिए निर्धारित 4.50 करोड़ रुपये का एक भी रुपया नहीं लिया। गृह निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये और कंप्यूटर खरीद के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान भी बिना उपयोग के रह गया। कुछ विधायकों और कर्मचारियों ने सीमित रूप से अग्रिम लिया, लेकिन कुल मिलाकर उपयोग अपेक्षा से काफी कम रहा। सरकारी अग्रिम बिना ब्याज के होती है, लेकिन समय पर समायोजन न करने पर ब्याज देना पड़ सकता है। यह स्थिति दर्शाती है कि योजना का पूरा लाभ नहीं लिया गया है।
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सरकारी अग्रिम का कम उपयोग यह दर्शाता है कि प्रशासनिक प्राथमिकताएँ सही दिशा में नहीं जा रही हैं, जिससे आम लोगों को आवश्यक सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
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