तुर्की की गेजहिन और भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों की तुलना: सामरिक क्षमताएँ और प्रभाव
Gezgin VS Brahmos: तुर्की की 'गेजहिन' मिसाइल के सामने कितनी घातक है भारत की 'ब्रह्मोस'? भूमध्य सागर में आमने-सामने
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
तुर्की ने अपनी गेजहिन क्रूज मिसाइल का प्रदर्शन किया है, जो अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल के समान है। इसकी रेंज 1,000 से 1,500 किलोमीटर है। दूसरी ओर, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल सुपरसोनिक है और इसकी रेंज 290 से 500 किलोमीटर है। दोनों मिसाइलें अलग-अलग सामरिक जरूरतों के लिए बनाई गई हैं।
- 01गेजहिन की रेंज 1,000 से 1,500 किलोमीटर है, जबकि ब्रह्मोस की रेंज 290 से 500 किलोमीटर है।
- 02गेजहिन की गति सबसोनिक (0.7-0.8 मैक) है, जबकि ब्रह्मोस की गति सुपरसोनिक (2.8-3.0 मैक) है।
- 03गेजहिन का वजन लगभग 2 टन है, जबकि ब्रह्मोस का वजन 2.5 से 3 टन के बीच है।
- 04ब्रह्मोस का वारहेड 200 से 300 किलोग्राम है, जो इसकी गतिज ऊर्जा से विनाशकारी प्रभाव डालता है।
- 05गेजहिन को भविष्य में पनडुब्बियों में भी इस्तेमाल करने की योजना है।
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तुर्की ने अपने गेजहिन क्रूज मिसाइल का प्रदर्शन किया है, जो अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल के समान है। इसकी रेंज 1,000 से 1,500 किलोमीटर है, जिससे यह दुश्मन के ठिकानों को गहराई में जाकर निशाना बना सकती है। दूसरी ओर, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज 290 से 500 किलोमीटर है। गेजहिन की गति सबसोनिक (0.7-0.8 मैक) है, जबकि ब्रह्मोस की गति सुपरसोनिक (2.8-3.0 मैक) है। दोनों मिसाइलों को अलग-अलग सामरिक जरूरतों के लिए विकसित किया गया है। गेजहिन अभी विकास के चरण में है, जबकि ब्रह्मोस ने युद्ध में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। ब्रह्मोस का वारहेड 200 से 300 किलोग्राम है, और इसकी गति के कारण इसे रोकना लगभग असंभव है। तुर्की की गेजहिन को भविष्य में पनडुब्बियों में भी लैस करने की योजना है, जिससे यह भूमध्य सागर में और भी प्रभावी साबित हो सकती है।
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तुर्की की गेजहिन मिसाइल के विकास से भूमध्य सागर क्षेत्र में सामरिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
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