शगुन में 101, 501 या 1001 रुपये का महत्व और 1 रुपये के सिक्के की वजह
शगुन के लिफाफे में क्यों डालते हैं 101, 501 या 1001 रू? बेशकीमती है 1 का सिक्का, क्या जानते हैं वजह
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भारतीय परंपरा में शगुन देने के लिए 101, 501 या 1001 रुपये रखने का विशेष महत्व है। शून्य को अशुभ मानते हुए, 1 रुपये का सिक्का नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है। यह परंपरा रिश्तों की मजबूती और सकारात्मकता को बढ़ावा देती है।
- 01शून्य को समाप्ति का प्रतीक मानते हुए, 1 रुपये का सिक्का नई शुरुआत का संकेत है।
- 02विषम संख्याएं जैसे 101, 501, 1001 को अविभाज्यता का प्रतीक माना जाता है।
- 031 रुपये का सिक्का शगुन की रकम को पूरा करता है और रिश्ते को बनाए रखता है।
- 04इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करना है।
- 05प्राचीन काल में शगुन में 11, 21, 51 रुपये दिए जाते थे, लेकिन अब यह राशि बढ़कर 101, 501 या 1001 हो गई है।
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भारतीय संस्कृति में शगुन देना एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जो शादी, मुंडन, गृहप्रवेश और जन्मदिन जैसे शुभ अवसरों पर निभाई जाती है। जब लोग शगुन में पैसे देते हैं, तो वे अक्सर 100 या 500 रुपये की बजाय 101, 501 या 1001 रुपये का चुनाव करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि 1 रुपये का सिक्का जोड़ने से यह राशि शून्य पर समाप्त नहीं होती, जो अशुभ माना जाता है। इसके बजाय, यह नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक बन जाता है। इसके अलावा, विषम संख्याएं जैसे 101, 501, 1001 को अविभाज्यता का प्रतीक माना जाता है, जिससे यह दर्शाता है कि दिए गए आशीर्वाद और प्रेम कभी बंटते नहीं हैं। एक रुपये का सिक्का शगुन की रकम को पूरा करता है और रिश्तों को बनाए रखने में मदद करता है। यह परंपरा मुख्य रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है, लेकिन भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग रूपों में देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विषम संख्याएं शुभ मानी जाती हैं और 1 का सिक्का रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, जिससे सकारात्मकता को आकर्षित किया जा सकता है।
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यह परंपरा रिश्तों को मजबूत बनाती है और सकारात्मकता को बढ़ावा देती है।
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