गीले कचरे का प्रबंधन: भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने की क्षमता
गीले कचरे से बदलेगी भारत की अर्थव्यवस्था, दिल्ली के कूड़े के पहाड़ होंगे खत्म

Image: Jagran
भारत में गीले कचरे का प्रबंधन 2047 तक अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार बन सकता है। सही नीतियों से यह क्षेत्र 5.1 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है, जिससे दिल्ली के कचरे के पहाड़ खत्म होंगे और ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी।
- 01सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, गीले कचरे का प्रबंधन 2047 तक 5.1 लाख करोड़ रुपये का बाजार बन सकता है।
- 02भारत के शहरों में निकलने वाले कुल ठोस कचरे का लगभग आधा हिस्सा गीला कचरा है।
- 03वर्तमान में कचरे के प्रोसेसिंग में 96% कंपोस्टिंग और 4% बायोमेथनेशन का उपयोग होता है।
- 04दिल्ली का 'मास्टर प्लान 2041' 'जीरो वेस्ट' और सर्कुलर इकोनामी की दिशा में है।
- 05नए अर्बन क्लस्टरों में बायोगैस प्लांट लगाकर कचरे को ऊर्जा में बदला जा सकता है।
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भारत के गीले कचरे का प्रबंधन आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था को नया आकार दे सकता है। थिंक-टैंक काउंसिल आन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सही नीतियां अपनाई जाती हैं, तो गीले कचरे का प्रबंधन 2047 तक 5.1 लाख करोड़ रुपये का बाजार बन सकता है। वर्तमान में, भारत के शहरों में ठोस कचरे का लगभग आधा हिस्सा गीला कचरा है, जिसमें किचन और बागवानी का कचरा शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक बायोमेथनेशन तकनीक के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है और कंप्रेस्ड बायो-गैस का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। दिल्ली के लिए, यह मॉडल कचरे के पहाड़ों को खत्म करने में सहायक होगा और स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
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दिल्ली में गीले कचरे के बेहतर प्रबंधन से कचरे के पहाड़ों को खत्म किया जा सकेगा और स्थानीय तापमान में कमी आएगी।
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