मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बाल विवाह मामले में सख्त आदेश दिए
बाल विवाह पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, पति को दिया निर्देश, 'बीवी के भरण-पोषण के पैसे मां-बाप से मांगो, जिन्होंने 13 साल की उम्र में करा दी शादी'
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बाल विवाह के मामले में पीड़िता के पति को निर्देश दिया है कि यदि वह पत्नी का भरण-पोषण नहीं कर सकता, तो उसे अपने माता-पिता से पैसे मांगने चाहिए। कोर्ट ने भरण-पोषण की राशि को बढ़ाकर ₹6000 प्रति माह किया।
- 01हाईकोर्ट ने पत्नी के भरण-पोषण की राशि को ₹2000 से बढ़ाकर ₹6000 प्रति माह किया।
- 02कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि यदि उसके पास पैसे नहीं हैं, तो उसे अपनी पत्नी के माता-पिता से पैसे मांगने चाहिए।
- 03शादी के समय लड़की की उम्र 13 साल थी और लड़के की उम्र 18 साल थी।
- 04कोर्ट ने कहा कि बाल विवाह कराने वाले माता-पिता को भविष्य में बच्चों की वित्तीय जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार रहना होगा।
- 05कोर्ट ने आदेश की प्रति नीमच फैमिली कोर्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बाल विवाह मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पीड़िता की याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस गजेंद्र सिंह ने पति की भरण-पोषण राशि को बढ़ाकर ₹6000 प्रति माह कर दिया, जो पहले ₹2000 थी। कोर्ट ने कहा कि यदि पति के पास भरण-पोषण के लिए पैसे नहीं हैं, तो उसे अपनी पत्नी के माता-पिता से पैसे मांगने चाहिए, जिन्होंने उसकी शादी 13 साल की उम्र में कराई। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता को पहले ही बाल विवाह का शिकार होना पड़ा है और अब उसे मामूली भरण-पोषण राशि देकर फिर से प्रताड़ित किया जा रहा है। अदालत ने माता-पिता की कानूनी और वित्तीय जवाबदेही तय करते हुए कहा कि उन्हें भविष्य में बच्चों की वित्तीय जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार रहना होगा। यह आदेश नीमच फैमिली कोर्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
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इस निर्णय से पीड़िताओं को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है और समाज में बाल विवाह के खिलाफ एक सख्त संदेश गया है।
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