जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पीएसए के तहत हिरासत के दो आदेश किए रद्द
Srinagar News: हाईकोर्ट ने पीएसए के तहत हिरासत के दो आदेश किए रद्द
Amar Ujala
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत दो लोगों की निवारक हिरासत को गैर-कानूनी करार दिया। अदालत ने हिरासत के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि आरोप कानून-व्यवस्था के दायरे में आते हैं, न कि सार्वजनिक व्यवस्था के।
- 01जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने दो हिरासत आदेश रद्द किए।
- 02हिरासत को गैर-कानूनी और अमान्य करार दिया गया।
- 03अदालत ने कहा कि हिरासत के आधार पुरानी सामग्री पर आधारित थे।
- 04सरकार के रुख को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह सजा देने वाली लगती है।
- 05अधिकारियों को तुरंत हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को रिहा करने का निर्देश दिया।
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने सोमवार को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत दो व्यक्तियों की निवारक हिरासत को रद्द कर दिया। अदालत ने सोपोर के इरफान मजीद लोन की हिरासत को गैर-कानूनी करार देते हुए कहा कि यह पुराने आधारों पर आधारित थी और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक नहीं थी। इसी तरह, बांदीपोरा के सुहैल अहमद पारे के खिलाफ भी जारी हिरासत आदेश को रद्द किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिरासत के आरोप कानून-व्यवस्था के दायरे में आते हैं, जो पीएसए के तहत हिरासत के लिए आवश्यक नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि हिरासत सजा देने वाली लगती है और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन व्यक्तियों को तुरंत रिहा करें।
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इस निर्णय से हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को न्याय प्राप्त होगा और यह कानून के तहत मानवाधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करेगा।
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