राघव चड्ढा का दलबदल: 4 साल पहले पेश किया गया बिल और इसके प्रभाव
राघव चड्ढा खुद दल बदल के खिलाफ लेकर आए थे बिल, जानें 4 साल पुराने इस अधिनियम में क्या था
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राघव चड्ढा, जो आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए हैं, ने चार साल पहले एक बिल पेश किया था जो दलबदल के नियमों में बदलाव की मांग करता था। यदि यह बिल पास हो जाता, तो दलबदल के लिए आवश्यक सदस्यों की संख्या बढ़कर तीन-चौथाई हो जाती।
- 01राघव चड्ढा ने 2022 में दलबदल के नियमों में बदलाव के लिए एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था।
- 02बिल पास होने पर दलबदल के लिए आवश्यक सदस्यों की संख्या दो-तिहाई से बढ़कर तीन-चौथाई हो जाती।
- 03चड्ढा ने समूह के रूप में पार्टी छोड़कर अपनी सीट बचाई।
- 04दलबदल विरोधी कानून में व्यक्तिगत और सामूहिक दल-बदल के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं।
- 05कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चड्ढा ने जानबूझकर अकेले पार्टी नहीं छोड़ी।
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राघव चड्ढा (आम आदमी पार्टी के पूर्व सांसद) ने 2022 में संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था, जिसमें दलबदल के नियमों में बदलाव की मांग की गई थी। वर्तमान में, दलबदल के लिए दो-तिहाई सदस्यों की आवश्यकता होती है, जबकि चड्ढा के प्रस्ताव के अनुसार यह संख्या बढ़कर तीन-चौथाई हो जाती। यदि यह बिल पास हो जाता, तो चड्ढा को अपनी पार्टी छोड़ने के लिए अधिक सांसदों की जरूरत होती। चड्ढा ने समूह के रूप में पार्टी छोड़कर अपनी सीट बचाने का प्रयास किया, क्योंकि अकेले पार्टी छोड़ने पर उन्हें अपनी सीट गंवानी पड़ सकती थी। दलबदल विरोधी कानून, जो राजनीतिक सौदेबाजी को रोकने के लिए बनाया गया था, में व्यक्तिगत दल-बदल को दंडित किया जाता है, जबकि सामूहिक दल-बदल को संरक्षण दिया जाता है। यह स्थिति राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देती है।
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यदि दलबदल के नियमों में बदलाव होता, तो इससे राजनीतिक स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता था, जिससे आम लोगों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सकता था।
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