भारत में शेयर बायबैक की वापसी: टैक्स बदलाव और कमजोर बाजार का प्रभाव
भारत में शेयर बायबैक की वापसी, टैक्स बदलाव और कमजोर बाजार ने बढ़ाया कंपनियों का आकर्षण
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भारत में कंपनियों ने शेयर बायबैक योजनाओं की घोषणा की है, जो हाल के टैक्स बदलावों और शेयर कीमतों में गिरावट के कारण हो रही है। विप्रो, अरविंदो फार्मा और सायंट जैसी कंपनियों ने इस महीने बायबैक प्रस्तावित किए हैं, जिससे निवेशकों को लाभ पहुंचाने की रणनीति में बदलाव का संकेत मिलता है।
- 01भारत में शेयर बायबैक की गतिविधियों में तेजी आई है।
- 02टैक्स नियमों में बदलाव ने बायबैक को आकर्षक बना दिया है।
- 03कंपनियों ने अपने मुनाफे को शेयरधारकों में बांटने के लिए बायबैक का सहारा लिया है।
- 04निफ्टी 50 में लगभग 8% की गिरावट ने बायबैक को प्रोत्साहित किया है।
- 05बायबैक का चलन शेयर की असल कीमत को दर्शाने का एक तरीका है।
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भारत में शेयर बायबैक की गतिविधियों में हाल ही में तेजी आई है, जिसमें कंपनियों ने अपने शेयर पुनर्खरीद करने के कार्यक्रमों की घोषणा की है। इस महीने विप्रो, अरविंदो फार्मा और सायंट जैसी कंपनियों ने बायबैक प्रस्तावित किए हैं। जानकारों का मानना है कि यह रुझान टैक्स नियमों में हालिया बदलाव और शेयर कीमतों में गिरावट के कारण हो रहा है। वित्त अधिनियम, 2026 के तहत नए टैक्स नियमों के लागू होने से बायबैक को फिर से आकर्षक बनाया गया है। पिछले दो वर्षों में बायबैक गतिविधियां धीमी रही थीं, लेकिन अब कंपनियां अपने मुनाफे को शेयरधारकों में बांटने के लिए बायबैक का सहारा ले रही हैं। प्राइम डेटाबेस के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में 16 कंपनियों ने 19,500 करोड़ रुपये के शेयर पुन: खरीदे, जो वित्त वर्ष 2025 के 8,034 करोड़ रुपये से अधिक है। बाजार में गिरावट ने भी बायबैक को प्रोत्साहित किया है, जिससे कंपनियों के लिए यह एक लाभकारी विकल्प बन गया है।
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बायबैक के चलते निवेशकों को लाभ मिलने की संभावना है, जिससे शेयरधारकों की आय में वृद्धि हो सकती है।
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