डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं 20% तक महंगी, मरीजों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं 20 फीसदी तक हुईं महंगी, मरीजों की जेब पर बढ़ा बोझ
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डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाओं की कीमतों में 15-20% की वृद्धि हुई है, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। यह बढ़ोतरी कच्चे माल की कीमतों और परिवहन खर्च में वृद्धि के कारण हुई है। उत्तर प्रदेश में लाखों लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं, और दवाओं की महंगाई निम्न और मध्यम आय वर्ग के मरीजों को अधिक प्रभावित कर रही है।
- 01डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाओं की कीमतें 15-20% बढ़ी हैं।
- 02कच्चे माल और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण दाम बढ़े हैं।
- 03उत्तर प्रदेश में लगभग 4.9% वयस्क आबादी डायबिटीज से प्रभावित है।
- 04महंगी दवाओं के कारण कई मरीज इलाज बीच में छोड़ देते हैं।
- 05नई रेट लिस्ट के अनुसार, कुछ दवाओं की कीमतों में पहले से ही 15% की वृद्धि हो चुकी है।
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डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाओं की कीमतों में 15-20% की वृद्धि ने मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। पिछले वर्ष भी दवाओं के दाम में 10-15% की वृद्धि हुई थी। दवा कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि कच्चे माल की कीमतों, आयात लागत और परिवहन खर्च में वृद्धि के कारण हुई है। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता विकास रस्तोगी ने बताया कि कई दवाओं में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट विदेशों से आयात किए जाते हैं, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतों में वृद्धि से दवाओं की उत्पादन लागत बढ़ गई है। लखनऊ में डायबिटीज की दवाओं और इंसुलिन की सालाना खपत लगभग 80-90 करोड़ रुपये है। दवाओं की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के मरीजों पर पड़ रहा है, जिससे कई मरीज महंगी दवाओं के कारण इलाज छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।
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दवाओं की कीमतों में वृद्धि से डायबिटीज के मरीजों को अधिक खर्च करना पड़ेगा, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
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