हंटावायरस: चूहों और गिलहरियों से फैलने वाला संक्रमण, सावधानी बरतें
चूहों और गिलहरी से फैलता है हंटा वायरस; घबराएं नहीं ऐसे करें अपना और अपनों का बचाव
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हंटावायरस, जो मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों से फैलता है, हाल ही में चर्चा का विषय बना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोविड-19 से अलग है और भारत में इसका कोई बड़ा प्रकोप नहीं है। सावधानी बरतने की आवश्यकता है, विशेषकर स्वच्छता और चूहों पर नियंत्रण के उपायों के माध्यम से।
- 01हंटावायरस चूहों और गिलहरियों से फैलता है, लेकिन यह कोविड-19 की तरह संक्रामक नहीं है।
- 02भारत में फिलहाल हंटावायरस का कोई बड़ा प्रकोप नहीं है।
- 03संक्रमण का मुख्य कारण संक्रमित चूहों का मूत्र, मल या लार है।
- 04स्वच्छता और चूहों पर नियंत्रण मुख्य बचाव उपाय हैं।
- 05गंभीर मामलों में मृत्यु दर 30 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है।
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हंटावायरस, जो चूहों और गिलहरियों से फैलता है, हाल ही में नीदरलैंड के जहाज एमवी होंडियस पर संक्रमण के मामलों के बाद चर्चा में आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस कोविड-19 से अलग है और भारत में इसका कोई बड़ा प्रकोप नहीं है। हंटावायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के मूत्र, मल या लार के सूखे कणों के माध्यम से फैलता है। यह संक्रमण सामान्यतः व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता, इसलिए यह महामारी का रूप नहीं लेता। हालांकि, गंभीर मामलों में इसकी मृत्यु दर 30 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है। विशेषज्ञों ने स्वच्छता, चूहों पर नियंत्रण और सतर्कता को बचाव के प्रमुख उपाय बताया है। संक्रमण के प्रारंभिक लक्षण सामान्य वायरल जैसे बुखार, सिरदर्द और थकान हो सकते हैं।
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हंटावायरस के मामलों की चर्चा के चलते लोगों को स्वच्छता और चूहों पर नियंत्रण के उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
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