भारत-नेपाल लिपुलेख विवाद: नेपाल के दावों पर भारत की स्पष्ट प्रतिक्रिया
India-Nepal Lipulekh Dispute: लिपुलेख पर नेपाल के दावे से बढ़ा तनाव! भारत की दो टूक- बातचीत करेंगे, दबाव नहीं मानेंगे
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे को लेकर तनाव बढ़ गया है। नेपाल ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत-चीन के लिपुलेख मार्ग पर आपत्ति जताई, जबकि भारत ने स्पष्ट किया कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन एकतरफा दावों को स्वीकार नहीं करेगा।
- 01नेपाल ने लिपुलेख पर अपने दावे को दोहराया है।
- 02भारत ने कहा कि लिपुलेख मार्ग का उपयोग दशकों से हो रहा है।
- 03भारत ने नेपाल के दावों को 'एकतरफा कृत्रिम क्षेत्रीय विस्तार' बताया।
- 04कैलाश मानसरोवर यात्रा का मुद्दा विवाद को और बढ़ा रहा है।
- 052020 से लिपुलेख विवाद में वृद्धि हुई है।
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भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। नेपाल ने हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग पर आपत्ति जताई, जिसे भारत ने 1954 से उपयोग में लाने का दावा किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह 'एकतरफा और कृत्रिम क्षेत्रीय दावों' को स्वीकार नहीं करेगा, जबकि नेपाल ने अपने दावे को दोहराते हुए कहा कि यह क्षेत्र उसका है। नेपाल का कहना है कि 1816 की सुगौली संधि के तहत लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके हिस्से हैं। यह विवाद 2020 में तेज हुआ था जब नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण है और इस यात्रा को पिछले वर्ष फिर से शुरू किया गया था। हालाँकि, नेपाल ने लिपुलेख मार्ग पर व्यापार और यात्रा गतिविधियों पर आपत्ति जताई थी, जिससे यह मुद्दा दोनों देशों के बीच संवेदनशील कूटनीतिक विवाद बन गया है।
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यह विवाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग को प्रभावित कर सकता है।
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