भारतीय टेक वर्कर ने 7 बार H-1B वीजा के लिए आवेदन किया, अब मिला ग्रीन कार्ड
7 बार अप्लाई करने पर भी नहीं मिला H1B वीजा, अब भारतीय टेक वर्कर सीधे पा गया ग्रीन कार्ड? जानिए कैसे
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
एक भारतीय महिला टेक वर्कर, ऐशानी बी, ने 2019 से 2025 के बीच 7 बार H-1B वीजा के लिए आवेदन किया लेकिन हर बार रिजेक्ट हुईं। अंततः, उन्हें EB-1 वीजा के जरिए ग्रीन कार्ड मिला, जिससे वह अमेरिका में स्थायी रूप से रह सकती हैं।
- 01H-1B वीजा लॉटरी के आधार पर मिलता है, जिससे आवेदनकर्ताओं को अक्सर निराशा का सामना करना पड़ता है।
- 02ऐशानी बी ने 7 बार H-1B वीजा के लिए आवेदन किया लेकिन हर बार उनका आवेदन खारिज हो गया।
- 032022 में कनाडा जाने के बाद, उन्होंने L-1 वीजा पर अमेरिका लौटकर EB-1 वीजा के लिए आवेदन किया।
- 04EB-1 वीजा के तहत ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का कोई लॉटरी सिस्टम नहीं होता।
- 05EB-1 वीजा की तीन मुख्य कैटेगरी हैं, जिसमें से ऐशानी का केस EB-1C में आता है।
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अमेरिका में H-1B वीजा प्राप्त करना कठिन है, क्योंकि यह लॉटरी के आधार पर दिया जाता है। भारतीय टेक वर्कर ऐशानी बी ने 2019 से 2025 के बीच 7 बार H-1B वीजा के लिए आवेदन किया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा मिली। उन्होंने अपनी लिंक्डइन पोस्ट में कहा कि पहले रिजेक्शन ने उन्हें दुखी किया, लेकिन बाद में वह इस प्रक्रिया के लिए मानसिक रूप से तैयार हो गईं। 2022 में, ऐशानी कनाडा चली गईं और फिर L-1 वीजा पर अमेरिका लौट आईं। अंततः, 2025 में उन्हें EB-1 वीजा के जरिए ग्रीन कार्ड मिला। EB-1 एक एंप्लॉयमेंट बेस्ड वीजा है, जो उन लोगों को दिया जाता है जिनकी अपनी फील्ड में असाधारण योग्यता होती है। इसके तहत कोई लॉटरी नहीं होती, जिससे आवेदकों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। ऐशानी का केस EB-1C कैटेगरी में आता है, जो मल्टीनेशनल कंपनियों के मैनेजर्स के लिए है।
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ऐशानी की कहानी यह दिखाती है कि कैसे भारतीय टेक वर्कर्स अमेरिका में स्थायी निवास प्राप्त कर सकते हैं, भले ही H-1B वीजा प्राप्त करना कठिन हो।
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