संसदीय समिति ने 5जी स्लाइसिंग और नेट न्यूट्रलिटी पर मांगा जवाब
क्या 5जी स्लाइसिंग से प्रभावित हो रही नेट न्यूट्रलिटी? संसदीय समिति ने मांगा जवाब

Image: Jagran
भारत की संसदीय स्थायी समिति ने 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग के संभावित प्रभावों पर दूरसंचार विभाग और ट्राई से जवाब मांगा है। समिति ने चिंता जताई है कि प्रायोरिटी पोस्टपेड योजनाएं करोड़ों प्रीपेड उपयोगकर्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
- 01संसदीय समिति ने 5जी स्लाइसिंग सेवाओं के प्रभाव की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
- 02समिति ने 25 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए दूरसंचार विभाग और ट्राई को कहा है।
- 03भारत में केवल 10 प्रतिशत मोबाइल उपयोगकर्ता पोस्टपेड हैं, जबकि 90 प्रतिशत प्रीपेड सेवाओं का उपयोग करते हैं।
- 04एयरटेल ने भारत की पहली कमर्शियल 5जी नेटवर्क-स्लाइसिंग सेवा 'एयरटेल प्रायोरिटी पोस्टपेड' लॉन्च की है।
- 05समिति मेटा, एक्स, गूगल और अमेजन जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफार्म्स को भी तलब कर सकती है।
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भाजपा नेता निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने नेट न्यूट्रलिटी के उल्लंघन की चिंताओं पर दूरसंचार विभाग और ट्राई से जवाब मांगा है। समिति ने 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग सेवाओं के प्रभाव की समीक्षा करने का निर्देश दिया है, जिसमें सिंगापुर और ब्रिटेन के उदाहरण शामिल हैं। समिति ने चिंता व्यक्त की है कि कुछ टेलीकॉम कंपनियों के 'प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान' से करोड़ों प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान हो सकता है। वर्तमान में, देश में केवल 10 प्रतिशत मोबाइल उपयोगकर्ता पोस्टपेड हैं, जबकि 90 प्रतिशत प्रीपेड सेवाओं का लाभ उठाते हैं। एयरटेल द्वारा लॉन्च की गई 'एयरटेल प्रायोरिटी पोस्टपेड' सेवा के बाद यह विवाद बढ़ गया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि 'विशेष सेवाओं' की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, जिसका फायदा टेलीकॉम कंपनियां उठा रही हैं।
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यदि नेट न्यूट्रलिटी का उल्लंघन होता है, तो यह प्रीपेड उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
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