बैतूल में जल संकट: हरिमऊढाना गांव के लोग कुएं से पानी लाने को मजबूर
बैतूल में कागजों में ‘हर घर जल'...गांव में सूखे पड़े नल, बूंद-बूंद के लिए मौत से जंग, रस्सी के सहारे कुएं उतर रहे ग्रामीण
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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के हरिमऊढाना गांव में जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए सरकारी कुएं में रस्सियों के सहारे उतरना पड़ रहा है। दो साल पहले लगाए गए नल सूखे हैं, जिससे गांव में पानी की गंभीर कमी हो गई है।
- 01हरिमऊढाना गांव में लगभग 230 परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल आबादी करीब 1500 है।
- 02ग्रामीणों को एक पुराने सरकारी कुएं से दूषित पानी लाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
- 03गांव में दो साल पहले नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन नलों में पानी नहीं आया।
- 04महिलाओं को पानी के लिए कई किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं।
- 05मध्य प्रदेश की सरकार ने नल-जल योजना की तारीफ की है, लेकिन ग्रामीणों की वास्तविकता इसके विपरीत है।
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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के हरिमऊढाना गांव में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। यहां के ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए सरकारी कुएं में रस्सियों के सहारे उतरना पड़ रहा है। गांव में लगभग 230 परिवारों की आबादी करीब 1500 है, और पानी की गंभीर कमी के कारण लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। दो साल पहले नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन नलों में आज तक पानी नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हालात इतने खराब हैं कि महिलाएं पानी की तलाश में कई किलोमीटर तक जाती हैं, और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। हाल ही में मध्य प्रदेश की कैबिनेट मंत्री संपत्तिया उइके ने नल-जल योजना की तारीफ की, लेकिन गांव की वास्तविकता इसके विपरीत है।
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गांव में जल संकट के कारण ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
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