उत्तराखंड की रूपकुंड झील: कंकालों का रहस्य और पर्यटन का आकर्षण
भारत की कंकालों से भरी झील, जहां है सिर्फ हड्डियां ही हड्डियां, कहां से आए किसी को नहीं है पता!
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उत्तराखंड की रूपकुंड झील, जिसे 'कंकालों की झील' कहा जाता है, समुद्र तल से 16,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां 600-800 मानव कंकाल पाए गए हैं, जिनकी उत्पत्ति और मृत्यु का कारण आज तक अनजान है। यह झील रहस्यमय कहानियों और पर्यटन का केंद्र बन चुकी है।
- 01रूपकुंड झील में 600-800 मानव कंकाल पाए गए हैं, जिनमें से कुछ पर मांस भी लगा हुआ है।
- 02यह झील समुद्र तल से 16,500 फीट की ऊंचाई पर त्रिशूल पर्वत के पास स्थित है।
- 032004 में वैज्ञानिकों ने कार्बन डेटिंग से पुष्टि की कि यहां की हड्डियां 1000 साल से अधिक पुरानी हैं।
- 04स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, झील में कंकाल एक राजा, उसकी पत्नी और सैनिकों के हो सकते हैं, जो बर्फीले तूफान में फंसे थे।
- 05रूपकुंड झील अब ट्रैकर्स और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन चुकी है।
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उत्तराखंड की रूपकुंड झील, जिसे 'कंकालों की झील' के नाम से जाना जाता है, हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच स्थित है। यह झील समुद्र तल से 16,500 फीट की ऊंचाई पर है और यहां 600 से 800 मानव कंकाल पाए गए हैं। इन कंकालों की उत्पत्ति और मृत्यु का कारण आज तक ज्ञात नहीं है। 1942 में एक ब्रिटिश फॉरेस्ट रेंजर ने पहली बार इस झील के आसपास बिखरे कंकालों को देखा था। वैज्ञानिकों ने कार्बन डेटिंग के माध्यम से यह पाया कि यहां की हड्डियां 1000 साल से अधिक पुरानी हैं। स्थानीय कहानियों के अनुसार, ये कंकाल एक राजा, उसकी पत्नी और उनके सेवकों के हो सकते हैं, जो बर्फीले तूफान में फंस गए थे। यह झील अब ट्रैकर्स और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गई है, जो इसकी रहस्यमयता और खूबसूरती को देखने आते हैं।
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रूपकुंड झील का पर्यटन क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।
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