चंबल नदी में 1500 घड़ियाल और हजारों बाटागुर कछुए शावकों का जन्म
अंडों से बाहर आए 1500 नन्हे घड़ियाल और हजारों दुर्लभ बाटागुर कछुए

Image: Aaj Tak
धौलपुर, राजस्थान और मुरैना, मध्य प्रदेश के चंबल नदी में 1500 नन्हे घड़ियाल और 2500-3000 दुर्लभ बाटागुर कछुए शावकों ने अंडों से बाहर आकर जन्म लिया है। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य ने सुरक्षा उपायों के तहत इन जीवों की देखभाल की है।
- 011500 नन्हे घड़ियाल और 2500-3000 बाटागुर कछुए शावकों ने चंबल नदी में जन्म लिया।
- 02वन विभाग ने शावकों की सुरक्षा के लिए नदी किनारे पर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
- 03बाटागुर कछुए की तस्करी के कारण यह प्रजाति संकट में है।
- 04कृत्रिम हैचिंग के तहत 200 अंडों में से 100 शावक सुरक्षित बाहर आए हैं।
- 05चंबल नदी में 2,938 घड़ियाल और 1,512 मगरमच्छ सहित कई जलीय जीवों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
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राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की चंबल नदी में 1500 नन्हे घड़ियाल और 2500-3000 दुर्लभ बाटागुर कछुए शावकों ने हाल ही में अंडों से बाहर आकर प्राकृतिक जन्म लिया है। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य के अधिकारियों ने इन जीवों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। चंबल नदी के किनारों पर सुरक्षा के लिए फेंसिंग की गई है, जिससे शावकों को शिकारियों और प्राकृतिक खतरों से बचाया जा सके। वन विभाग ने कछुओं के अंडों को सुरक्षित स्थानों पर गड्ढे खोदकर दबाया था, जिससे अब शावक सीधे नदी में जा रहे हैं। चंबल नदी में जलीय जीवों की संख्या बढ़ रही है, जिसमें 2,938 घड़ियाल, 1,512 मगरमच्छ और कई प्रकार के बाटागुर कछुए शामिल हैं। हालाँकि, बाढ़ और तेज बहाव इन शावकों के लिए सबसे बड़े खतरे बने हुए हैं।
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चंबल नदी में घड़ियाल और कछुओं का जन्म स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगा और इन संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में मदद करेगा।
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