मोखरा गांव: स्वतंत्रता सेनानियों और पहलवानों की भूमि
Rohtak News: दो हजार साल पहले बसा था मोखरा, शहीदों, सेनानियों व पहलवानों ने दिलाई पहचान
Amar Ujala
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मोखरा गांव, जो कि रोहतक जिले में स्थित है, दो हजार साल पहले बसा था और स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों और पहलवानों की पहचान बन चुका है। यहां की पहलवान साक्षी मलिक ने 2016 के ओलंपिक में कांस्य पदक जीता, जिससे गांव में कुश्ती का उत्साह बढ़ा है।
- 01मोखरा गांव की स्थापना दो हजार साल पहले हुई थी।
- 02गांव में स्वतंत्रता सेनानियों और पहलवानों की लंबी परंपरा है।
- 03साक्षी मलिक ने 2016 के ओलंपिक में कांस्य पदक जीता।
- 04गांव में पांच अखाड़ों में पहलवान तैयार हो रहे हैं।
- 05गांव का सामाजिक ताना-बाना मजबूत है और सुविधाएं बढ़ रही हैं।
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मोखरा गांव, जो रोहतक जिले के हिसार रोड पर स्थित है, दो हजार साल पहले बसा था और यह स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों और पहलवानों की पहचान बना हुआ है। इस गांव में 17,500 मतदाता हैं और इसकी सांस्कृतिक धरोहर में आठ मंदिर और एक ऐतिहासिक तालाब शामिल हैं। गांव की पहलवान साक्षी मलिक ने 2016 के ओलंपिक में महिलाओं के कुश्ती वर्ग में कांस्य पदक जीता, जिससे गांव में कुश्ती के प्रति उत्साह बढ़ा है। अब यहां पांच अखाड़ों में पहलवान तैयार हो रहे हैं। गांव में सामाजिक भाईचारा मजबूत है और लोग एक-दूसरे के दुख-सुख में साथ खड़े रहते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि गांव की पहचान स्वतंत्रता सेनानियों और खिलाड़ियों के कारण है, जो उन्हें गर्व का अनुभव कराते हैं।
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साक्षी मलिक की सफलता ने गांव में कुश्ती के प्रति युवाओं में उत्साह बढ़ाया है, जिससे खेलों में भागीदारी बढ़ी है।
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