भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के पीछे की आर्थिक रणनीति
भारत ने क्यों शुरू किया था पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना? BPCL के पूर्व चेयरमैन ने बताई वजह

Image: News 18 Hindi
भारत सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का निर्णय प्रदूषण कम करने के साथ-साथ विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने के लिए लिया है। बीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन कृष्णकुमार गोपालन के अनुसार, देश 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है।
- 01भारत हर साल अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।
- 02सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- 03इथेनॉल के बाद, सरकार का ध्यान रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सौर और पवन ऊर्जा पर है।
- 04पेट्रोल पर 13-14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 38 रुपये प्रति लीटर की अंडर रिकवरी हो रही है।
- 05कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है, जिससे तेल कंपनियों पर दबाव कम हो सकता है।
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भारत में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण विदेशी कच्चा तेल है। इस समस्या का समाधान करने के लिए, सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर जोर दिया है। बीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन कृष्णकुमार गोपालन के अनुसार, भारत लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जो देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है। इस स्थिति को सुधारने के लिए, सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सौर और पवन ऊर्जा में निवेश बढ़ाने की योजना है। गोपालन ने बताया कि तेल कंपनियों ने वैश्विक संकटों के बावजूद ईंधन की आपूर्ति बनाए रखी है, लेकिन पेट्रोल और डीजल पर अंडर रिकवरी जारी है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होती हैं, तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंडर रिकवरी से आम जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
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