हांगकांग में मजदूरों की कठिनाइयाँ: कार्डबोर्ड के घरों में बिताते हैं दिन
दुनिया के अमीर शहर में ऐसी जिंदगी, दफ्ती के बॉक्स में ऐसे दिन गुजारते हैं मजदूर
Aaj Tak
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हांगकांग, जो दुनिया के सबसे अमीर शहरों में से एक है, में घरेलू कामगार महिलाएं कार्डबोर्ड के अस्थायी घरों में समय बिताती हैं। 'लाइव-इन' नियम के कारण, उन्हें अपने नियोक्ता के घर में रहना पड़ता है, जिससे उन्हें खुद का घर नहीं मिल पाता। यह स्थिति 'इनविजिबल लेबर क्राइसिस' के रूप में सामने आई है।
- 01हांगकांग में घरेलू कामगार महिलाओं को कार्डबोर्ड के अस्थायी घरों में रहना पड़ता है।
- 02इन महिलाओं को 'लाइव-इन' नियम के तहत अपने नियोक्ता के घर में रहना अनिवार्य है।
- 03यह स्थिति 'इनविजिबल लेबर क्राइसिस' के रूप में जानी जाती है।
- 04सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई है।
- 05कुछ लोग इसे अमीरी और गरीबी के बीच की खाई मानते हैं।
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हांगकांग, जिसे दुनिया के सबसे अमीर शहरों में से एक माना जाता है, में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें घरेलू कामगार महिलाएं पुलों और अंडरपास के नीचे कार्डबोर्ड के अस्थायी 'घर' बनाकर बैठी हैं। ये महिलाएं, जो आमतौर पर इंडोनेशिया और फिलीपींस से आती हैं, 'लाइव-इन' नियम के कारण अपने नियोक्ता के घर में रहने को मजबूर हैं। इस नियम के चलते उन्हें खुद का कोई अलग घर नहीं मिल पाता। वीडियो में ये महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर एक दिन की छुट्टी पर समय बिताते हुए कार्डबोर्ड से छोटे 'कमरे' बनाकर थोड़ी प्राइवेसी पाने की कोशिश करती हैं। कंटेंट क्रिएटर राफा ने इस स्थिति को 'इनविजिबल लेबर क्राइसिस' बताया है, यह दर्शाते हुए कि हांगकांग का आर्थिक ढांचा उन लोगों के श्रम पर निर्भर करता है, जिन्हें खुद रहने की जगह नहीं मिलती। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीखी बहस शुरू हो गई है, जिसमें कुछ लोग इसे अमीरी और गरीबी के बीच की खाई बताते हैं।
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इस स्थिति से हांगकांग में कामगारों की जीवनशैली पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, जिससे उनकी सामाजिक स्थिति और अधिकारों पर सवाल उठते हैं।
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