पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर भारत से की गुहार, अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाई चिंता
IWT: सिंधु जल संधि पर भारत की मार से तड़प रहा पाकिस्तान, अंतरराष्ट्रीय मंच से लगाई दिल्ली से गुहार
Image: Nbt Navbharattimes
पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत से अपील की है कि वह इस समझौते का सम्मान करे। दुशांबे में एक जल सम्मेलन में, पाकिस्तान ने भारत पर जल संसाधनों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि संधि का निलंबन खतरनाक मिसाल बनेगा।
- 01पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का सम्मान करने की भारत से अपील की है।
- 02भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित किया।
- 03डॉ. मुसादिक मलिक ने जल संसाधनों के राजनीतिकरण का आरोप लगाया।
- 04पाकिस्तान ने कहा कि संधि का निलंबन निचले प्रवाह वाले देशों के लिए खतरनाक होगा।
- 05सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी।
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पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि (IWT) के संबंध में भारत से गुहार लगाई है कि वह इस समझौते का सम्मान करे। दुशांबे में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन में, पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने भारत पर जल संसाधनों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संधि को निलंबित करने का कोई भी प्रयास खतरनाक मिसाल कायम करेगा। भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। पाकिस्तान ने बार-बार आरोप लगाया है कि भारत ने पानी के प्रवाह में बाधा डाली है। सिंधु जल संधि, जो 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी, भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का प्रावधान करती है। इस संधि के तहत भारत से बहने वाली छह नदियों का पानी पाकिस्तान को मिलता है, जबकि तीन पूर्वी नदियों का पानी भारत के पास है।
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भारत द्वारा सिंधु जल संधि का निलंबन पाकिस्तान के जल सुरक्षा और खाद्य उत्पादन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
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