जल संरक्षण के लिए 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान की पहल
’मोर गांव-मोर पानी महाअभियान से गांव-गांव में जल संरक्षण की नई चेतना’
Globalherald
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छत्तीसगढ़ में 'मोर गांव-मोर पानी महाअभियान' जल संरक्षण के लिए जनआंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह अभियान वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए गांवों में प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन कर रहा है।
- 01महाअभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जनभागीदारी आधारित आंदोलन में परिवर्तित करना है।
- 02प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ग्रामीणों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को जल संरक्षण के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी जा रही है।
- 035 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज टैंक की संरचना की जल संचयन क्षमता लगभग 1458 लीटर है।
- 04अभियान में रिज टू वैली अवधारणा पर आधारित जल संरक्षण उपायों का प्रचार किया जा रहा है।
- 05जल संरक्षण संरचनाएं कुओं और हैंडपंपों में जल उपलब्धता बढ़ाने में सहायक हैं।
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छत्तीसगढ़ में 'मोर गांव-मोर पानी महाअभियान' जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत गांव-गांव में व्यापक जागरूकता और प्रशिक्षण गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। बलरामपुर जिले में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए विभिन्न संरचनाओं के निर्माण के बारे में जानकारी दी गई। विशेष रूप से 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज टैंक की संरचना पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो लगभग 1458 लीटर जल संचयन की क्षमता रखती है। इसके अलावा, रिज टू वैली अवधारणा के तहत जल संरक्षण उपायों जैसे स्ट्रैगर्ड कंटूर ट्रेंच और सोख्ता गड्ढों के निर्माण के बारे में भी बताया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संकट के भविष्य के समाधान के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।
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जल संरक्षण उपायों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने की संभावना है।
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