नीलम भाटिया: संघर्ष की मिसाल, बेटियों को बनाया पीसीएस अधिकारी
Rishikesh: दुखों के पहाड़ को पार कर मां ने संवारी बेटियों की तकदीर, टिफिन बेचकर बनाया पीसीएस अधिकारी

Image: Amar Ujala
नीलम भाटिया, जिन्होंने अपने पति के निधन के बाद टिफिन सेवा शुरू की, ने अपनी दोनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर पीसीएस अधिकारी बनाया। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने शिक्षा को प्राथमिकता दी और अपने सपनों को साकार किया।
- 01नीलम भाटिया ने 27 साल की उम्र में पति को खोने के बाद टिफिन सेवा शुरू की।
- 02उनकी बड़ी बेटी शालिनी मंडलीय अर्थ सांख्यिकी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
- 03छोटी बेटी मीनाक्षी भाटिया का डिप्टी कलेक्ट्रेट पद पर चयन हुआ है।
- 04नीलम ने बेटियों की शिक्षा को कभी समझौता नहीं किया, भले ही आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।
- 05बेटियों ने मां के संघर्ष को देखकर कठिन परिश्रम किया और प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं।
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नीलम भाटिया की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे कठिनाइयों का सामना करते हुए भी उम्मीद की किरण को बनाए रखा जा सकता है। 27 वर्ष की उम्र में पति के निधन के बाद, नीलम ने अपने दो बेटियों, शिल्पा और मीनाक्षी की जिम्मेदारी संभाली। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने टिफिन सेवा शुरू की और दिन-रात मेहनत की। नीलम ने अपने बेटियों को शिक्षा के महत्व के बारे में सिखाया और कभी भी उनके पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दी। उनकी मेहनत रंग लाई और दोनों बेटियों ने प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं। शालिनी अब मंडलीय अर्थ सांख्यिकी अधिकारी हैं, जबकि मीनाक्षी डिप्टी कलेक्ट्रेट के पद पर चयनित हुई हैं। नीलम का सपना अब पूरा हुआ है, जो उन्होंने अपने पति के निधन के बाद देखा था।
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नीलम भाटिया की कहानी ने स्थानीय समुदाय में शिक्षा के महत्व को उजागर किया है।
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