मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: तलाकशुदा बेटियों को पेंशन का अधिकार
'तलाकशुदा बेटी को अधिकारों से नहीं किया जा सकता वंचित, पिता की पेंशन पर हक', मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Image: Jagran
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने तलाकशुदा बेटियों को परिवार का सदस्य मानते हुए उन्हें पेंशन का अधिकार दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर उन्हें अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय सामाजिक वास्तविकताओं के अनुरूप है।
- 01मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने तलाकशुदा बेटियों को परिवार का सदस्य मानने का आदेश दिया है।
- 02कोर्ट ने कहा कि पेंशन नियम 1976 में अविवाहित, विधवा और विवाहित बेटियों को परिवार का सदस्य माना गया है।
- 03तलाकशुदा बेटियों को अधिकारों से वंचित करना संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
- 04ज्योति श्रीवास्तव ने अपने पिता की पेंशन के लिए आवेदन किया था, जिसे विभाग ने निरस्त कर दिया था।
- 05कोर्ट ने कहा कि कानून की व्याख्या सामाजिक वास्तविकताओं और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि तलाकशुदा बेटियों को परिवार की परिभाषा से बाहर नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने यह आदेश तब दिया जब याचिकाकर्ता ज्योति श्रीवास्तव ने अपने पिता की पेंशन के लिए आवेदन किया था। उनके पिता, जो होम गार्ड विभाग में जिला कमांडेंट थे, ने उन्हें पेंशन का नामिनी बनाया था। विभाग ने यह कहते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया कि तलाकशुदा बेटी परिवार की श्रेणी में नहीं आती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेंशन नियम 1976 में अविवाहित, विधवा और विवाहित बेटियों को परिवार का सदस्य माना गया है, इसलिए तलाकशुदा बेटियों को अलग श्रेणी में रखकर उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून की व्याख्या सामाजिक वास्तविकताओं और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए।
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यह निर्णय तलाकशुदा बेटियों को उनके अधिकारों की रक्षा करेगा और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।
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